गर्मियों में पानी की कमी दिल पर ढाती है कहर, जानिए डिहाइड्रेशन कैसे चुपचाप करता है अटैक, पढ़ें एक्सपर्ट की चेतावनी

गर्मियों में डिहाइड्रेशन सिर्फ गला नहीं सुखाता, बल्कि दिल पर भी गंभीर हमला करता है। पानी और सोडियम-पोटेशियम की कमी से दिल की धड़कन और ब्लड सर्कुलेशन बिगड़ता है, जिससे बुजुर्गों, बच्चों और हार्ट पेशेंट्स के लिए हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

Updated : 23 July 2026, 3:49 PM IST
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New Delhi: जब गर्मी और उमस का प्रकोप बढ़ता है, तो गला सूखना और बहुत ज्यादा पसीना आना एक सामान्य बात लगती है। अक्सर हम पसीना आने पर इसे शरीर का एक कूलिंग सिस्टम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने की यह छोटी-सी भूल आपके दिल पर बेहद भारी पड़ सकती है? जी हां, डिहाइड्रेशन सिर्फ आपके गले को ही नहीं सुखाता, बल्कि यह आपके दिल की सेहत पर भी चुपचाप और गहरा हमला करता है।

पसीने के साथ बह जाते हैं दिल की धड़कन संभालने वाले मिनरल्स

गर्म मौसम में पसीना आना शरीर को ठंडा रखने की स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन जब पसीने के साथ शरीर से पानी बाहर निकलता है, तो उसके साथ-साथ सोडियम और पोटेशियम जैसे बेहद महत्वपूर्ण मिनरल्स भी बाहर बह जाते हैं।

ये खास पोषक तत्व हमारे दिल की धड़कन को नियंत्रित रखने के साथ-साथ हमारी मांसपेशियों और नसों के सुचारू संचालन में मुख्य भूमिका निभाते हैं। जब शरीर में इन मिनरल्स और पानी की कमी हो जाती है, तो दिल पर काम का बोझ अचानक बढ़ जाता है। नतीजतन, पूरे शरीर में खून को सही तरीके से पंप करने के लिए आपके दिल को सामान्य से कहीं अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

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ब्लड सर्कुलेशन पर ब्रेक और दिल पर दोहरा दबाव

डिहाइड्रेशन का सबसे खतरनाक असर शरीर के ब्लड सर्कुलेशन पर देखने को मिलता है। जब शरीर में तरल पदार्थों की कमी होती है, तो खून का बहाव प्रभावित होने लगता है। खून सही से पंप न हो पाने के कारण शरीर के बाकी जरूरी अंगों और अंगों के ऊतकों तक ऑक्सीजन की सही सप्लाई नहीं पहुंच पाती।

इस स्थिति से निपटने और ऑक्सीजन की पूर्ति करने के लिए दिल तेजी से और जोर-जोर से धड़कना शुरू कर देता है। अचानक धड़कन का इस तरह बढ़ना शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है।

हीटस्ट्रोक का बढ़ता खतरा, कौन हैं सबसे ज्यादा निशाने पर?

ब्लड प्रेशर और सर्कुलेशन में आने वाली यह गड़बड़ी गर्मी से होने वाली अत्यधिक थकान और हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर परिस्थितियों को तुरंत न्योता देती है। कार्डियोलॉजी की सलाहकार डॉ. निशा के मुताबिक, डिहाइड्रेशन से दिल पर पड़ने वाला यह एक्स्ट्रा दबाव हर किसी के लिए नुकसानदेह है, लेकिन कुछ वर्ग ऐसे हैं जिन्हें इससे सबसे ज्यादा खतरा रहता है-

बुजुर्ग: जिनकी शारीरिक क्षमता और अंगों की रिकवरी धीमी होती है।

बच्चे: जो अक्सर खेल-कूद में पानी पीना भूल जाते हैं।

दिल के मरीज: जिनके दिल पर पहले से ही दबाव होता है और थोड़ी सी भी गड़बड़ी उनके लिए गंभीर हो सकती है।

बाहर काम करने वाले लोग: जो लंबे समय तक तेज धूप और उमस के सीधे संपर्क में रहते हैं।

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समय रहते समझें डिहाइड्रेशन का सच

कार्डियोलॉजी की सलाहकार डॉ. निशा के अनुसार, डिहाइड्रेशन को सिर्फ "शरीर में पानी की कमी" समझ लेना बहुत आधी-अधूरी और खतरनाक जानकारी है। यह महज प्यास लगने या थकावट महसूस होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपके कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम (दिल और रक्त वाहिकाओं) को सीधा प्रभावित करता है।

इसलिए गर्मी के मौसम में अपने दिल को सुरक्षित रखने के लिए केवल प्यास लगने का इंतजार न करें, बल्कि लगातार पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करते रहें। सतर्कता ही आपको और आपके दिल को गर्मी के इस अदृश्य हमले से बचा सकती है।

Location :  New Delhi

Published :  23 July 2026, 3:49 PM IST

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