देवघर में मह‍िला शक्ति की मिसाल: आशा कुमारी को बांस के हुनर ने दी नई उड़ान, बदली सैकड़ों जिंदगियां

पूर्णिया की आशा कुमारी ने बांस के हुनर से एक बड़ा कारोबार खड़ा कर मिसाल पेश की है। उनके बनाए उत्पाद अब देश के साथ-साथ विदेशों तक पहुंच रहे हैं। इस पहल से करीब एक हजार महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। आशा कुमारी अब अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी सशक्त बना रही हैं।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 6 April 2026, 6:46 AM IST
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Deoghar: देवघर में इन दिनों एक ऐसी कहानी चर्चा में है। यह मेहनत और जुनून की ताकत को बखूबी दिखाती है। पूर्णिया की रहने वाली आशा कुमारी ने साधारण से दिखने वाले बाँस को अपनी कला से खास बना दिया। कभी शौक के तौर पर शुरू हुआ यह काम आज एक बड़े कारोबार का रूप ले चुका है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान बना चुका है।

संघर्ष के बीच नहीं छोड़ा जुनून

बचपन से ही आशा कुमारी को बाँस से अलग-अलग उत्पाद बनाने का शौक था, लेकिन उस समय उन्हें परिवार का पूरा सहयोग नहीं मिल सका। इसके बावजूद उन्होंने अपने हुनर को जिंदा रखा। शादी के बाद उन्होंने दोबारा इस काम को शुरू किया। शुरुआत भले ही छोटी थी, लेकिन धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और उनका काम लोगों के बीच पसंद किया जाने लगा।

देश से विदेश तक पहुंची पहचान

आज मणिपुरी बैम्बो आर्किटेक्चर के नाम से उनका कारोबार पूरे देश में जाना जाता है। उनके बनाए बांस के उत्पाद जैसे बोतलें, मग, सजावटी सामान और घरेलू उपयोग की चीजें कनाडा, जर्मनी और इंग्लैंड जैसे देशों तक पहुंच रही हैं। इससे न सिर्फ उनका नाम रोशन हुआ है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

एक हजार से ज्यादा महिलाओं को मिला रोजगार

इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब तक करीब एक हजार महिलाएं इससे जुड़ चुकी हैं। ये महिलाएं आज आत्मनिर्भर बनकर अपनी आजीविका चला रही हैं। इनमें दिव्यांग महिलाएं भी शामिल हैं।

महिलाओं को सिखा रही हुनर की कला

आशा कुमारी खुद भी अन्य महिलाओं को यह कला सिखा रही हैं। जिससे ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इस हुनर को सीखकर अपनी जिंदगी बदल सकें। उनका यह प्रयास समाज में एक नई सोच को जन्म दे रहा है। जहां हुनर को पहचान मिल रही है और महिलाएं आगे बढ़ रही हैं।

परिवार का बदला नजरिया, मिला साथ

शुरुआत में उनके पति, यह बिहार पुलिस में कार्यरत हैं। इस काम को लेकर थोड़ा असहज थे। आज उन्हें अपनी पत्नी की सफलता पर गर्व है। उनके बेटे ने भी कहा कि उन्हें अपनी मां से प्रेरणा मिलती है और अब वे भी इस कारोबार से जुड़ना चाहते हैं।

मंचों पर भी मिली पहचान

इस पहल को महिला विकास मंच के 11वें वार्षिक उत्सव में भी सराहा गया। जहां विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने इसे सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण बताया।

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स्थानीय स्तर पर भी बढ़ रहा रोजगार

इस कारोबार के लिए कच्चा माल यानी बांस बिहार और झारखंड के कई इलाकों जैसे हजारीबाग, टाटा और बॉर्डर क्षेत्रों से मंगाया जाता है। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल रहा है और यह पहल आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रही है।

Location :  Deoghar

Published :  6 April 2026, 6:46 AM IST

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