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बांस के हुनर से आशा कुमारी की बदली किस्मत
Deoghar: देवघर में इन दिनों एक ऐसी कहानी चर्चा में है। यह मेहनत और जुनून की ताकत को बखूबी दिखाती है। पूर्णिया की रहने वाली आशा कुमारी ने साधारण से दिखने वाले बाँस को अपनी कला से खास बना दिया। कभी शौक के तौर पर शुरू हुआ यह काम आज एक बड़े कारोबार का रूप ले चुका है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान बना चुका है।
बचपन से ही आशा कुमारी को बाँस से अलग-अलग उत्पाद बनाने का शौक था, लेकिन उस समय उन्हें परिवार का पूरा सहयोग नहीं मिल सका। इसके बावजूद उन्होंने अपने हुनर को जिंदा रखा। शादी के बाद उन्होंने दोबारा इस काम को शुरू किया। शुरुआत भले ही छोटी थी, लेकिन धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और उनका काम लोगों के बीच पसंद किया जाने लगा।
आज मणिपुरी बैम्बो आर्किटेक्चर के नाम से उनका कारोबार पूरे देश में जाना जाता है। उनके बनाए बांस के उत्पाद जैसे बोतलें, मग, सजावटी सामान और घरेलू उपयोग की चीजें कनाडा, जर्मनी और इंग्लैंड जैसे देशों तक पहुंच रही हैं। इससे न सिर्फ उनका नाम रोशन हुआ है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
देवघर : बांस के साधारण काम को आशा कुमारी ने बनाया बड़ा कारोबार। आज उनके प्रोडक्ट्स देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच रहे हैं। इस पहल से एक से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं। हुनर और हौसले की ये कहानी दे रही नई प्रेरणा।#WomenEmpowerment #BambooCraft #InspiringStory #StartupIndia… pic.twitter.com/01wJkk4kxK
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) April 5, 2026
इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब तक करीब एक हजार महिलाएं इससे जुड़ चुकी हैं। ये महिलाएं आज आत्मनिर्भर बनकर अपनी आजीविका चला रही हैं। इनमें दिव्यांग महिलाएं भी शामिल हैं।
आशा कुमारी खुद भी अन्य महिलाओं को यह कला सिखा रही हैं। जिससे ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इस हुनर को सीखकर अपनी जिंदगी बदल सकें। उनका यह प्रयास समाज में एक नई सोच को जन्म दे रहा है। जहां हुनर को पहचान मिल रही है और महिलाएं आगे बढ़ रही हैं।
शुरुआत में उनके पति, यह बिहार पुलिस में कार्यरत हैं। इस काम को लेकर थोड़ा असहज थे। आज उन्हें अपनी पत्नी की सफलता पर गर्व है। उनके बेटे ने भी कहा कि उन्हें अपनी मां से प्रेरणा मिलती है और अब वे भी इस कारोबार से जुड़ना चाहते हैं।
इस पहल को महिला विकास मंच के 11वें वार्षिक उत्सव में भी सराहा गया। जहां विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने इसे सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण बताया।
इस कारोबार के लिए कच्चा माल यानी बांस बिहार और झारखंड के कई इलाकों जैसे हजारीबाग, टाटा और बॉर्डर क्षेत्रों से मंगाया जाता है। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल रहा है और यह पहल आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रही है।
Location : Deoghar
Published : 6 April 2026, 6:46 AM IST