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Russia ने इस बार US को दे डाली खुली चुनौती (Img: AI Generated Image)
New Delhi: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस और अमेरिका के बीच तनाव अब एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। अमेरिका ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नया कानून लागू किया है, तो रूस की ओर से भी कड़ा बयान सामने आया है।
रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा है कि अमेरिकी प्रतिबंधों का जवाब सैन्य प्रतिरोध की भाषा में दिया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि रूस इसके जवाब में कौन-सा सैन्य कदम उठा सकता है।
मेदवेदेव का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े नए प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस कानून का नाम दिवंगत अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है। इसका मकसद रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों पर दबाव बढ़ाना और उन नेटवर्क पर कार्रवाई करना है, जिनके जरिए रूस पश्चिमी प्रतिबंधों से बचकर तेल की बिक्री करता है।
इस कानून का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उन देशों से जुड़ा है जो रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं। कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ प्रमुख रूसी ऊर्जा खरीदार देशों से अमेरिका में आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत या चीन पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया गया है। कानून राष्ट्रपति को ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार देता है और आगे का फैसला अमेरिकी प्रशासन पर निर्भर करेगा।
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भारत और चीन इस मामले में खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि दोनों देश रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार रहे हैं। इसलिए आने वाले समय में अमेरिकी फैसलों का असर केवल रूस-अमेरिका संबंधों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है।
भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता रहा है। रूस से मिलने वाला तेल भी इस सप्लाई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में अगर रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी व्यापारिक दबाव बढ़ता है, तो भारत के सामने ऊर्जा खरीद और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के बीच संतुलन का सवाल उठ सकता है।
अमेरिकी कानून का असर सिर्फ तेल खरीद तक सीमित नहीं है। इसमें रूसी बैंकों, अधिकारियों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले लोगों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। रूस की तेल ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले कथित ‘शैडो फ्लीट’ पर भी अमेरिकी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया है।
इस कानून में अमेरिकी परमाणु ऊर्जा जरूरतों से जुड़े रूसी यूरेनियम के लिए कुछ विशेष अपवाद मौजूद हैं। यही वजह है कि अमेरिकी प्रतिबंध नीति में रणनीतिक जरूरतों और व्यावहारिक निर्भरता को लेकर बहस शुरू हुई है। कानून में अमेरिकी परमाणु रिएक्टरों के लिए इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम और मेडिकल आइसोटोप से जुड़े अपवादों का उल्लेख है।
रूस और अमेरिका के बीच यह नया तनाव दिखाता है कि यूक्रेन युद्ध का असर अब युद्ध के मैदान से कहीं आगे तक पहुंच चुका है। प्रतिबंध, तेल, गैस, बैंकिंग, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ये सभी इस संघर्ष से जुड़े अहम मोर्चे बन चुके हैं।
रूस की ओर से सैन्य प्रतिरोध की भाषा और अमेरिका की ओर से आर्थिक दबाव बढ़ाने की नीति के बीच आगे क्या होता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। खासकर भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा खरीदारों के लिए आने वाले अमेरिकी फैसले महत्वपूर्ण होंगे।
Location : New Delhi
Published : 20 September 2026, 10:40 AM IST
Topics : Donald Trump India Russia Ukraine War USA