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ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के छठे हफ्ते में हालात और भी गंभीर हो गए हैं। खाड़ी क्षेत्र में हाल ही में हुई सैन्य घटनाओं और लापता अमेरिकी पायलट की खबर ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इस तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर भी दिख रहा है।
इजरायल ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी पायलट लापता (Source: Google)
New Delhi: मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। पिछले 24 घंटों में ईरान और खाड़ी के आसमान में अमेरिका के दो घातक लड़ाकू विमानों के गिरने से हड़कंप मच गया है। ईरान की सेना अब एक लापता अमेरिकी पायलट की सरगर्मी से तलाश कर रही है, जिसने विमान के गिरने से पहले खुद को इजेक्ट (बाहर निकलना) कर लिया था। इस घटना ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें उन्होंने कहा था कि आसमान में अमेरिकी सेना का पूरा कब्जा है।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से की गई भारी गोलाबारी में अमेरिका का एक दो सीटों वाला F-15E जेट मार गिराया गया है। वहीं, एक अन्य घटना में A-10 वॉर्थोग फाइटर जेट को भी निशाना बनाया गया, जो हमले के बाद कुवैत में जाकर क्रैश हो गया। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के सूत्रों का कहना है कि दो वायुसैनिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन एक पायलट अभी भी लापता है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दक्षिण-पश्चिमी इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है और पायलट को पकड़ने या मारने वाले के लिए इनाम की घोषणा भी की गई है।
यह युद्ध अब केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा है। ईरान ने कुवैत के एक बिजली और पानी के प्लांट पर हमला किया है, जिससे वहां पीने के पानी का संकट पैदा हो सकता है। इसके अलावा, दुबई में भी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट किए जाने के बाद उनका मलबा इमारतों पर गिरा है। इजरायल के हाइफा बंदरगाह के पास भी मिसाइलें गिरने की खबरें हैं। अमेरिका ने लेबनान में रहने वाले अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी है, क्योंकि वहां मौजूद अमेरिकी यूनिवर्सिटीज और संस्थानों पर हमले का खतरा बढ़ गया है।
युद्ध के छठे हफ्ते में प्रवेश करते ही पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था डगमगाने लगी है। गुरुवार को अमेरिकी तेल की कीमतों में 11 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है और 300 से ज्यादा घायल हैं। पाकिस्तान के जरिए युद्धविराम कराने की कोशिशें भी पूरी तरह नाकाम रही हैं, क्योंकि ईरान ने अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया है।
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को सीधी चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना अभी अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में नहीं उतरी है। उन्होंने कहा कि पुलों के बाद अब ईरान के पावर प्लांट्स उनके निशाने पर होंगे। दूसरी तरफ, ईरान के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबफ ने तंज कसते हुए कहा है कि अमेरिका जो 'सत्ता बदलने' का सपना देख रहा था, वह अब सिर्फ अपने लापता पायलटों को खोजने तक सिमट कर रह गया है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें लापता पायलट के रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं।