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इलाहाबाद हाई कोर्ट (Img: AI Generated)
Banda: बांदा के चर्चित जमील प्रधान हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। करीब ढाई दशक पुराने इस मामले में अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही इतने मजबूत हैं कि घटना को लेकर किसी प्रकार का संदेह नहीं रह जाता। इसी आधार पर कोर्ट ने दोषियों की अपील खारिज कर दी।
यह मामला नवंबर 2002 का है, जब गोयरा गांव के तत्कालीन प्रधान जमील खान अपने परिजनों के साथ बाजार से लौट रहे थे। आरोप है कि रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे दो लोगों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। अचानक हुए हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल जमील को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अगले दिन उन्होंने दम तोड़ दिया।
फायरिंग की इस घटना में एक राहगीर भी गोली लगने से घायल हुआ था। वारदात के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की। जांच के दौरान हत्या में इस्तेमाल किए गए अवैध हथियार और कारतूस भी बरामद किए गए, जिन्हें अदालत ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।
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मामले की सुनवाई के दौरान प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही ने अहम भूमिका निभाई। अदालत ने कहा कि गवाहों ने घटना का विस्तृत और स्पष्ट विवरण दिया, जिसमें कोई विरोधाभास नहीं पाया गया। घटना दिन के उजाले में हुई थी, इसलिए हमलावरों की पहचान और घटनास्थल को लेकर भी किसी तरह का भ्रम नहीं रहा।
बांदा की सत्र अदालत ने साल 2005 में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर अब अंतिम फैसला आ गया है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दोषियों के खिलाफ आरोप साबित होते हैं और सजा में हस्तक्षेप की कोई वजह नहीं है। अदालत ने जमानत पर चल रहे दोनों दोषियों को तुरंत निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके।
Location : Banda
Published : 20 June 2026, 7:36 PM IST
Topics : Allahabad High Court banda UP Police