बदायूं में सैकड़ों दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट, ऐतिहासिक प्रदर्शनी अचानक विवादों और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ी

बदायूं के गांधी ग्राउंड में दशकों पुरानी प्रदर्शनी नगरपालिका की अनुमति प्रक्रिया पूरी न होने के कारण बीच में रोक दी गई। इससे सैकड़ों दुकानदारों की रोजी-रोटी संकट में आ गई है। 50 लाख की रसीद के बावजूद फायर NOC न मिलने से पूरा आयोजन ठप पड़ गया।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 11 June 2026, 2:31 PM IST
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Badaun: बदायूं में दशकों से लगने वाली गांधी ग्राउंड की ऐतिहासिक प्रदर्शनी इस बार अचानक विवादों और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गई। अनुमति प्रक्रिया पूरी न होने के कारण नगरपालिका प्रशासन ने चल रही प्रदर्शनी को बीच में ही रोक दिया। इस फैसले के बाद पूरे मैदान में सन्नाटा पसर गया और सैकड़ों दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया।

50 लाख की रसीद, लेकिन अधूरी अनुमति

जानकारी के अनुसार नगरपालिका ने प्रदर्शनी के ठेके के बदले लगभग 50 लाख रुपये की रसीद काटकर जमीन ठेकेदार को सौंप दी थी। इसके बाद दुकानें लगाई गईं और दूर-दराज से व्यापारी भी यहां पहुंच गए। प्रदर्शनी शुरू भी हो गई, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अनुमति की पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी।

सूत्रों के मुताबिक फाइल में पुलिस और गोपनीय विभाग की संस्तुति तो शामिल थी, लेकिन अग्निशमन विभाग की अनिवार्य NOC अभी तक नहीं मिल पाई थी। इसी एक कागज की कमी के चलते प्रशासन को प्रदर्शनी रोकनी पड़ी।

अचानक बंद होने से मची अफरा-तफरी

प्रदर्शनी बंद होने की खबर फैलते ही गांधी ग्राउंड में अफरा-तफरी मच गई। झूले, स्टॉल और दुकानें एक-एक कर बंद हो गईं। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से आए दुकानदारों ने भारी निवेश किया था। किराया, माल और मजदूरी में लगाए गए हजारों रुपये अब डूबने के खतरे में हैं।

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दुकानदारों का कहना है कि यह प्रदर्शनी उनकी आजीविका का बड़ा सहारा होती है। एक व्यापारी ने कहा कि पूरे साल का खर्च इसी मेले से निकलता है, लेकिन अचानक रोक ने सबकुछ चौपट कर दिया।

नगरपालिका प्रशासन का दावा

नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी के अनुसार फायर विभाग की NOC प्रक्रिया अंतिम चरण में है और संभावना है कि जल्द ही अनुमति मिल जाएगी। प्रशासन का दावा है कि अनुमति मिलते ही प्रदर्शनी को दोबारा शुरू कराया जा सकता है।

हालांकि, इस स्थिति ने नगरपालिका की कार्यप्रणाली और तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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दुकानदारों में गुस्सा और चिंता

दुकानदारों का कहना है कि जब 50 लाख रुपये पहले ही जमा कर लिए गए थे, तो अनुमति प्रक्रिया पहले पूरी क्यों नहीं की गई। उनका आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा छोटे व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है।

भविष्य अधर में

अब सभी की नजरें आने वाले निर्णय पर टिकी हैं। यदि समय पर अनुमति नहीं मिली तो न केवल यह ऐतिहासिक प्रदर्शनी खतरे में पड़ जाएगी, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आर्थिक स्थिति भी गंभीर संकट में आ सकती है।

Location :  Badaun

Published :  11 June 2026, 2:31 PM IST

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