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ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध के चलते होर्मुज जलसंधि बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। IEA ने 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का फैसला लिया है, जबकि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर पार पहुंच गई हैं।
आईईए के प्रमुख फातिह बिरोल (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसके असर वैश्विक स्तर पर साफ दिखाई देने लगे हैं। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावी रूप से बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। इस स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने गंभीर चिंता जताई है।
IEA के प्रमुख Fatih Birol ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि यह संकट पहले आए दो बड़े तेल संकटों के मिश्रण जैसा बनता जा रहा है। उनके अनुसार, यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो दुनिया का कोई भी देश इसके प्रभाव से बच नहीं पाएगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर त्वरित और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
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ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए IEA के सदस्य देशों ने 11 मार्च को एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। एजेंसी ने अपने आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई है। यह IEA के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी स्टॉक रिलीज मानी जा रही है। इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ा है। यह जलमार्ग प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही का मुख्य रास्ता है। इसके ठप होने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, वहीं डीजल, जेट फ्यूल और एलपीजी जैसी रिफाइंड उत्पादों की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलसंधि को नहीं खोला गया तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों पर बड़ा हमला करेगा। इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी हमले की स्थिति में वह न केवल इस जलमार्ग को स्थायी रूप से बंद कर सकता है, बल्कि उन देशों के ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बना सकता है जहां अमेरिकी सैन्य उपस्थिति है।
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इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है, जो तेल आयात पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक विकास पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह संकट किस दिशा में जाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।