ईरान संकट से भारत पर मंडराया बड़ा खतरा! तेल, रुपये और कमाई पर पड़ सकता है ऐसा असर

ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। तेल, गैस और खाड़ी देशों से आने वाले पैसों पर भारत की निर्भरता अब बड़ा सवाल बनती दिख रही है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस संकट का असर सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 13 May 2026, 9:26 AM IST
google-preferred

New Delhi: पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब सिर्फ युद्ध या कूटनीति का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी गहराई से दिखाई देने लगा है। ईरान और खाड़ी क्षेत्र में लगातार बिगड़ते हालात ने भारत के सामने कई आर्थिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इसी बीच देश के चीफ इकनॉमिक एडवाइजर वी. अनंत नागेश्वरन का बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने इस संकट को भारत के लिए “आर्थिक परीक्षा” जैसा बताया है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात देश के भुगतान संतुलन, महंगाई, रुपये की स्थिति और आयात लागत पर सीधा असर डाल सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भरोसा भी जताया कि भारत की मजबूत आर्थिक नीतियां और पिछले कुछ वर्षों में किए गए सुधार इस संकट से निपटने में मदद करेंगे।

भारत क्यों है सबसे ज्यादा प्रभावित?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों पर निर्भर है। देश अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 87 प्रतिशत आयात करता है। इसमें भी लगभग 46 प्रतिशत तेल होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है। यही वजह है कि पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी बन जाता है।

महंगाई पर ट्रंप का बड़ा फैसला, पेट्रोल-डीजल टैक्स खत्म करने की तैयारी

स्थिति सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं है। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है और उसका 90 प्रतिशत से ज्यादा खाड़ी देशों से आता है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है या सप्लाई प्रभावित होती है तो गैस सिलेंडर से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

खाड़ी देशों से आता है भारत का बड़ा पैसा

पश्चिम एशिया का भारत की अर्थव्यवस्था में एक और बड़ा योगदान है-रेमिटेंस। लाखों भारतीय खाड़ी देशों में काम करते हैं और हर साल बड़ी मात्रा में पैसा भारत भेजते हैं। आंकड़ों के अनुसार भारत को मिलने वाले कुल रेमिटेंस का करीब 38 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।

अगर वहां आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं या रोजगार पर असर पड़ता है तो इसका सीधा असर भारतीय परिवारों की आय पर पड़ सकता है। खासकर केरल, उत्तर प्रदेश, बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में इसका प्रभाव ज्यादा महसूस किया जा सकता है, जहां बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में रोजगार करते हैं।

रुपये और महंगाई पर बढ़ा दबाव

चीफ इकनॉमिक एडवाइजर ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती भुगतान संतुलन और चालू खाते को संभालने की है। युद्ध और तनाव के माहौल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ जाएगा।

इसका सीधा असर भारतीय रुपये पर भी पड़ रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 5 प्रतिशत कमजोर हो चुका है। रुपये में कमजोरी आने से विदेशों से सामान खरीदना और महंगा हो जाता है, जिससे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट और गहराता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ परिवहन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

सरकार के सामने क्या हैं विकल्प?

भारत सरकार फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को तेल आयात के वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान देना होगा, ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता कम की जा सके। इसके अलावा विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखना और महंगाई को नियंत्रित करना भी बड़ी चुनौती होगी।

Us-iran Conflict: ट्रंप ने ईरान का जवाब किया खारिज, युद्धविराम वार्ता टूटी

नागेश्वरन ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह राजकोषीय अनुशासन बनाए रखा है, इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाया है और आर्थिक सुधार किए हैं, वे इस संकट से निपटने में मददगार साबित हो सकते हैं।

क्या आम लोगों पर पड़ेगा असर?

अगर पश्चिम एशिया का संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर आम लोगों की जेब पर महसूस किया जा सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन खर्च बढ़ सकता है, जिससे खाने-पीने और रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो सकती हैं। इसके अलावा विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की कमाई और नौकरी पर असर पड़ने की आशंका भी बनी हुई है। यही वजह है कि सरकार और आर्थिक विशेषज्ञ इस संकट को सिर्फ विदेश नीति का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता से जुड़ा बड़ा खतरा मान रहे हैं।

Location :  New Delhi

Published :  13 May 2026, 9:26 AM IST

Advertisement