BRICS Summit 2026: ब्रिक्स बैठक के बीच छिड़ा कूटनीतिक युद्ध, क्या मुस्लिम देश ही बनेगा ईरान का सबसे बड़ा दुश्मन?

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक शुरू। ईरान युद्ध और इजरायल की कार्रवाई पर निंदा प्रस्ताव की मांग, लेकिन यूएई की आपत्ति ने बढ़ाई मुश्किलें। होर्मुज शिपिंग रूट और ऊर्जा सुरक्षा पर भारत की कूटनीति पर टिकी दुनिया की नजर।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 14 May 2026, 10:14 AM IST
google-preferred

New Delhi: भारत की राजधानी में आज से शुरू हुई दो दिवसीय ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक कूटनीतिक खींचतान का केंद्र बन गई है। ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया के अस्थिर हालातों के बीच शुरू हुई इस बैठक में सदस्य देशों के अलग-अलग हितों ने एक साझा घोषणापत्र की राह मुश्किल कर दी है।

ईरान का 'विशेष आग्रह' और यूएई का वीटो

बैठक में ईरान ने एक विशेष प्रस्ताव रखते हुए भारत से आग्रह किया कि वह ब्रिक्स के अध्यक्ष के रूप में अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ आम सहमति बनाने में नेतृत्व करे। ईरान चाहता है कि समूह स्पष्ट रूप से इन हमलों की निंदा करे।

हालांकि, ईरान की इस मंशा को तगड़ा झटका तब लगा जब ब्रिक्स के ही सदस्य संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पश्चिम एशिया के हालातों पर संयुक्त घोषणापत्र से दूरी बना ली। यूएई की इस आपत्ति ने समूह के भीतर गहरी होती दरार को उजागर कर दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और 'नेविगेशन शुल्क' का मुद्दा

युद्ध के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग 'होर्मुज शिपिंग रूट' पर भी चर्चा गरमाई हुई है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम घरीबाबादी ने संकेत दिए कि ईरान जहाजों की आवाजाही के लिए एक नए तंत्र पर काम कर रहा है, जिसमें सुरक्षा के बदले शुल्क (चुंगी) लेने की संभावना है।

चीन रवाना होने से पहले ट्रंप का ईरान से यूक्रेन तक बड़ी डील का संकेत

भारत के लिए राहत की बात यह है कि ईरान ने स्पष्ट किया है कि मित्र राष्ट्र होने के नाते भारत के जहाजों से ऐसा कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। ईरान ने मार्ग में आ रही रुकावटों के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है।

ऊर्जा सुरक्षा और रूस-चीन का रुख

बैठक में ऊर्जा सुरक्षा और तेल की कीमतों पर युद्ध के असर को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरान के अब्बास अराघची खुद दिल्ली पहुंचे हैं, जबकि चीन ने अपने राजदूत के जरिए उपस्थिति दर्ज कराई है।

जानकारों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के संभावित चीन दौरे के कारण वांग यी इस बैठक से दूर रहे। भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय वार्ता में चाबहार पोर्ट और कनेक्टिविटी पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

ईरान संकट से भारत पर मंडराया बड़ा खतरा! तेल, रुपये और कमाई पर पड़ सकता है ऐसा असर

ब्रिक्स की एकता पर सवाल

यह बैठक ब्रिक्स के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित हो रही है। विस्तार के बाद यह समूह अब केवल आर्थिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय है। लेकिन सऊदी अरब, यूएई और ईरान जैसे देशों के आपसी हितों के टकराव ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह समूह वास्तव में एक वैश्विक विकल्प बन पाएगा?

Location :  New Delhi

Published :  14 May 2026, 10:08 AM IST

Advertisement