लखनऊ बैंक घोटाले का बड़ा खुलासा, CBI ने कोलकाता और दिल्ली से दो आरोपी दबोचे

लखनऊ में सामने आए करोड़ों के बैंक फ्रॉड मामले में CBI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यूपी फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक अकाउंट खुलवाकर 64.82 करोड़ रुपये की ठगी की गई। जांच में RTGS के जरिए रकम अलग-अलग फर्मों में ट्रांसफर करने का खुलासा हुआ है।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 14 May 2026, 8:14 PM IST
google-preferred

Lucknow : राजधानी एक बार फिर बड़े आर्थिक अपराध की वजह से सुर्खियों में है। सरकारी संस्था के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस हाईप्रोफाइल बैंक फ्रॉड केस में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई (CBI) ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामला इतना बड़ा है कि जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों ने बेहद शातिर तरीके से सरकारी विभाग के नाम का इस्तेमाल कर बैंकिंग सिस्टम को ही चकमा दे दिया। लखनऊ के बैंकिंग नेटवर्क और सरकारी संस्थाओं से जुड़े इस मामले ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत के आधार पर दर्ज

सीबीआई की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, मामला बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। आरोप है कि कुछ निजी व्यक्तियों ने अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन यानी UPFC के नाम पर बैंक ऑफ इंडिया की सदर शाखा, लखनऊ में फर्जी खाता खुलवाया। इसके लिए नकली KYC दस्तावेज, फर्जी ऑथराइजेशन लेटर और झूठे बोर्ड रेजोल्यूशन का इस्तेमाल किया गया।

छह अलग-अलग फर्मों में ट्रांसफर

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बैंक अधिकारियों को भरोसा दिलाया कि यह खाता UPFC की ओर से खोला जा रहा है। इसी आधार पर बैंक को 64.82 करोड़ रुपये खाते में ट्रांसफर करने के लिए तैयार किया गया। रकम जमा होने के बाद आरोपियों ने बेहद तेजी से करीब 6.95 करोड़ रुपये RTGS के जरिए कोलकाता और नई दिल्ली स्थित छह अलग-अलग फर्मों में ट्रांसफर कर दिए।

गोरखपुर में ट्रेनें होंगी कैंसिल और डायवर्ट : लखनऊ-वाराणसी रूट पर भी असर, चेक करें स्टेटस

पूरे मामले का खुलासा

पूरे मामले का खुलासा हुआ जब UPFC अधिकारियों ने बैंक को बताया कि उनकी ओर से ऐसा कोई अधिकार पत्र जारी ही नहीं किया गया था और गिरफ्तार आरोपी संस्था से किसी भी तरह जुड़े नहीं हैं। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने मामले की शिकायत सीबीआई से की, जिसके बाद जांच एजेंसी हरकत में आई।

कौन-कौन लोग शामिल थे?

सीबीआई टीम ने कई राज्यों में लगातार छापेमारी और फील्ड ऑपरेशन चलाए। लंबे समय तक तकनीकी निगरानी और तलाश के बाद दीपक संजीव सुवर्णा और दीपक यादव को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या बैंक के भीतर से भी किसी ने मदद की थी।

Location :  Lucknow

Published :  14 May 2026, 8:14 PM IST

Advertisement