AI बूम ने पलटा खेल: MSCI EM इंडेक्स के टॉप 10 से भारतीय कंपनियां बाहर, 20 साल में पहली बार बड़ा बदलाव

एआई और सेमीकंडक्टर शेयरों में तेज उछाल ने वैश्विक निवेश प्रवाह को बदल दिया है। MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स के टॉप 10 शेयरों से भारतीय कंपनियों की पहली बार विदाई हो गई है, जिससे बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 9 June 2026, 10:09 AM IST
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Mumbai: दुनिया भर के शेयर बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों की जबरदस्त तेजी ने निवेश के समीकरण ही बदल दिए हैं। इसका सीधा असर MSCI इमर्जिंग मार्केट्स (EM) इंडेक्स पर भी देखने को मिला है, जहां लंबे समय बाद बड़ा उलटफेर हुआ है। पहली बार वर्ष 2000 के बाद ऐसा माना जा रहा है कि इस इंडेक्स के टॉप 10 शेयरों में किसी भी भारतीय कंपनी की मौजूदगी नहीं रही। यह बदलाव न सिर्फ भारत बल्कि पूरे उभरते बाजारों की स्थिति को नए नजरिए से दिखा रहा है।

दो दशक बाद टॉप 10 से बाहर हुई भारतीय कंपनियां

विश्लेषकों के अनुसार, MSCI EM इंडेक्स के टॉप 10 में भारतीय कंपनियों का बाहर होना एक ऐतिहासिक घटना है। पहले इस सूची में भारत की मजबूत कंपनियां लगातार जगह बनाती रही थीं, लेकिन अब एआई और टेक्नोलॉजी आधारित शेयरों की तेज रफ्तार ने स्थिति बदल दी है। यह इंडेक्स वैश्विक स्तर पर 700 अरब डॉलर से अधिक के पैसिव फंड्स के लिए बेंचमार्क माना जाता है, इसलिए इसमें बदलाव का असर दुनियाभर के निवेश पोर्टफोलियो पर पड़ता है।

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HDFC बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज की रैंकिंग में गिरावट

भारत की दो सबसे बड़ी कंपनियां HDFC Bank और Reliance Industries अब टॉप 10 से बाहर होकर क्रमशः 11वें और 12वें स्थान पर पहुंच गई हैं। मार्च में ये कंपनियां सातवें और आठवें स्थान पर थीं। हाल के महीनों में शेयर कीमतों में कमजोरी के चलते दोनों का इंडेक्स में भार घटकर 0.8 प्रतिशत से नीचे चला गया है, जिससे उनकी रैंकिंग प्रभावित हुई है।

AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों का दबदबा बढ़ा

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में आई तेज रफ्तार है। ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन की टेक कंपनियों ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। खासकर TSMC, Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियों ने भारी रिटर्न देकर इंडेक्स में अपनी पकड़ मजबूत की है। इन कंपनियों के शेयरों में इसी अवधि में 48% से लेकर 194% तक की तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जो निवेशकों के रुझान को पूरी तरह बदलने के लिए काफी है।

क्यों पिछड़ रहे हैं भारतीय शेयर?

आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीराम वेलायुधन के अनुसार, वैश्विक बाजार में AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर की बढ़ती मांग ने भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी घटाई है। उनका कहना है कि इंडेक्स वेट में बदलाव का असर सिर्फ पैसिव फंड्स पर ही नहीं, बल्कि एक्टिव फंड मैनेजमेंट पर भी पड़ता है, क्योंकि निवेश निर्णय इंडेक्स के आधार पर प्रभावित होते हैं।

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भारत का कुल भार छह साल के निचले स्तर पर

MSC I EM इंडेक्स में भारत की हिस्सेदारी घटकर लगभग 10.87% पर आ गई है, जो पिछले छह वर्षों का सबसे निचला स्तर है। 2024 में भारत का भार जिस ऊंचाई पर था, उससे यह लगभग आधा रह गया है। यह गिरावट दिखाती है कि ग्लोबल कैपिटल अब तेजी से टेक-ड्रिवन बाजारों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

नुवामा रिसर्च की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नुवामा के अल्टरनेटिव और क्वांटिटेटिव रिसर्च प्रमुख अभिलाष पगारिया के अनुसार, उभरते बाजारों में भारत की स्थिति धीरे-धीरे कमजोर हुई है। इसका मुख्य कारण ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन की मजबूत टेक रैली है, जिसने वैश्विक निवेश का बड़ा हिस्सा आकर्षित किया है। इन बाजारों में AI आधारित कंपनियों का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है।

Location :  Mumbai

Published :  9 June 2026, 9:56 AM IST

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