UPSC Inspiration Story: भारत के दो ऐसे गांव, जहां की गलियों से निकलते हैं सबसे ज्यादा IAS-IPS अधिकारी

भारत के दो ऐसे गाँव जहाँ हर दूसरे घर में है सरकारी अफसर! यूपी का माधोपट्टी और राजस्थान का नया बास देश के लिए मिसाल बन चुके हैं। एक घर से 11 IAS तो दूसरे गाँव से 500+ अफसर निकलने के पीछे की प्रेरणादायी कहानी। जानिए पूरा सच

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 31 July 2026, 1:21 PM IST
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New Delhi: हमारे देश में अक्सर कहा जाता है कि भारत की असली आत्मा उसके गांवों में बसती है। लेकिन उत्तर प्रदेश का माधोपट्टी और राजस्थान का नया बास इस कहावत को एक नया और गौरवशाली आयाम देते हैं। ये कोई आम गांव नहीं हैं, बल्कि यह ऐसी उर्वरा भूमि है जहां की चौपालों में खेती-किसानी के साथ-साथ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) जैसी कठिन परीक्षाओं की रणनीतियां बुनी जाती हैं। इन दोनों गाँवों ने अपनी लगन और मेहनत के दम पर ऑफिसर विलेज का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया है।

यूपी का माधोपट्टी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला मुख्यालय से महज़ 6 किलोमीटर दूर बसा माधोपट्टी गांव अपनी विशिष्ट पहचान के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। करीब 4000 की आबादी और महज 75-80 परिवारों वाले इस छोटे से गाँव ने अब तक देश को 47 से अधिक IAS और IPS अधिकारी दिए हैं।

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इस गांव की सबसे हैरान कर देने वाली बात डॉ. सजल कुमार सिंह के परिवार की है, जहां अलग-अलग पीढ़ियों को मिलाकर कुल 11 IAS अधिकारी निकले हैं। इस परिवार के चार सगे भाई भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर एक मिसाल कायम कर चुके हैं। यहां के युवाओं के लिए प्रयागराज जाकर तैयारी करना और चयनित होकर आने के बाद नए छात्रों का मार्गदर्शन करना एक अटूट परंपरा बन चुका है।

राजस्थान का नया बास

दूसरी तरफ, राजस्थान के नीम का थाना जिले का नया बास गाँव बदलाव की एक ऐसी अद्भुत गाथा बयान करता है जो किसी का भी दिल जीत ले। एक समय था जब यह गाँव चोरी और डकैती जैसी आपराधिक घटनाओं के लिए जाना जाता था। लेकिन 1972 में गांव के के.एल. मीणा ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के बाद पहले ही प्रयास में UPSC पास कर इतिहास रच दिया।

उनके IAS बनते ही पूरे गाँव की सोच और दिशा बदल गई। आज करीब 800 परिवारों वाले इस गाँव से 500 से ज्यादा बड़े सरकारी अधिकारी निकल चुके हैं, जिनमें 15 जिला कलेक्टर और 5 एसपी शामिल हैं।

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सफलता का राज

इन दोनों ही गाँवों की सफलता का कोई जादुई फॉर्मूला नहीं है, बल्कि इसके पीछे वर्षों का अनुशासन, सादगी और पारिवारिक सहयोग की संस्कृति है। यहां जब कोई अभ्यर्थी परीक्षा में सफल नहीं हो पाता, तो वह निराश होने के बजाय अगले बैच के युवाओं को पढ़ाने और उनका मार्गदर्शन करने में जुट जाता है। इसी परस्पर सहयोग और शिक्षा के प्रति अटूट निष्ठा ने इन दोनों गाँवों को देश के नक्शे पर एक मिसाल बनाकर खड़ा कर दिया है।

Location :  New Delhi

Published :  31 July 2026, 1:21 PM IST

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