इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेंडिंग मामलों को निपटाने में आएगी तेजी, पांच रिटायर्ड जजों की हुई नियुक्ति, देखें लिस्ट

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों के बोझ को कम करने के लिए पांच रिटायर्ड जजों को दो साल के लिए एड-हॉक जज नियुक्त करने की सिफारिश की है। यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 224-A के तहत की जाएगी।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 4 February 2026, 8:37 AM IST
google-preferred

New Delhi: देश की न्यायिक व्यवस्था में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक अहम फैसला लिया है। कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के लिए पांच रिटायर्ड जजों को दो साल की अवधि के लिए एड-हॉक (तदर्थ) जज के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की है।

यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 224-A के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य हाईकोर्ट में लंबित मामलों की तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करना है।

कॉलेजियम में किन जजों ने लिया फैसला

यह फैसला भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने लिया। कॉलेजियम में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जे. महेश्वरी भी शामिल थे। बैठक में इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामलों की गंभीर पेंडेंसी को ध्यान में रखते हुए रिटायर्ड जजों की तदर्थ नियुक्ति को जरूरी माना गया।

गोरखपुर के लाल ने रचा इतिहास: गुफरान हाशमी की बड़ी कामयाबी, पास की एफएमजीई परीक्षा

इन रिटायर्ड जजों के नाम पर लगी मुहर

कॉलेजियम ने जिन पांच रिटायर्ड जजों को एड-हॉक जज बनाए जाने की सिफारिश की है, उनमें शामिल हैं-

  • जस्टिस मोहम्मद फैज आलम खान
  • जस्टिस मोहम्मद असलम
  • जस्टिस सैयद आफताब हुसैन रिजवी
  • जस्टिस रेनू अग्रवाल
  • जस्टिस ज्योत्सना शर्मा

इन सभी जजों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में ही तदर्थ जज के रूप में नियुक्त किया जाएगा।

क्यों जरूरी पड़ी एड-हॉक जजों की नियुक्ति

इलाहाबाद हाईकोर्ट देश के सबसे अधिक लंबित मामलों वाले हाईकोर्ट्स में से एक है। हजारों मामले वर्षों से फैसले की प्रतीक्षा में हैं। कॉलेजियम ने साफ किया कि मौजूदा न्यायाधीशों पर काम का अत्यधिक दबाव है, ऐसे में तदर्थ जजों की नियुक्ति से पुराने मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।

महराजगंज: मेधावी छात्रों पर बरसी कामयाबी की चमक, 21-21 हजार के चेक पाकर खिले होनहारों के चेहरे

अनुच्छेद 224-A क्या कहता है

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 224-A हाईकोर्ट में तदर्थ जजों की नियुक्ति का प्रावधान करता है। इसके तहत किसी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से किसी रिटायर्ड जज को अस्थायी रूप से जज के तौर पर कार्य करने का अनुरोध कर सकते हैं। इन जजों को वही अधिकार और शक्तियां प्राप्त होती हैं, जो नियमित जजों को मिलती हैं।

तदर्थ जजों की संख्या को लेकर तय सीमा

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष 30 जनवरी को यह स्पष्ट किया था कि किसी भी हाईकोर्ट में तदर्थ जजों की संख्या उस कोर्ट की कुल स्वीकृत जज संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अस्थायी नियुक्तियां नियमित न्यायिक ढांचे की जगह न लें, बल्कि सहायक भूमिका निभाएं।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 4 February 2026, 8:37 AM IST

Advertisement
Advertisement