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गोरखपुर के नथमलपुर निवासी गुफरान हाशमी ने एफएमजीई जैसी कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर डॉक्टर बनने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
गुफरान हाशमी
Gorakhpur: कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं। गोरखनाथ क्षेत्र के नथमलपुर निवासी गुफरान हाशमी ने इसी बात को सच कर दिखाया है। सीमित संसाधनों, कठिन हालात और लगातार चुनौतियों के बावजूद गुफरान ने एफएमजीई यानी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन जैसी कठिन परीक्षा पास कर ली है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने डॉक्टर बनने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। उनकी इस सफलता से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा गोरखपुर गर्व महसूस कर रहा है।
एफएमजीई परीक्षा को देश की सबसे कठिन मेडिकल परीक्षाओं में गिना जाता है। विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए यह परीक्षा किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं मानी जाती। गुफरान हाशमी ने इस चुनौती को पूरी गंभीरता, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ स्वीकार किया। पढ़ाई के लंबे घंटे, मानसिक दबाव और असफलता के डर के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि निरंतर प्रयास और धैर्य से असंभव भी संभव हो सकता है।
परिवारजनों के अनुसार गुफरान हाशमी बचपन से ही पढ़ाई को लेकर बेहद संजीदा रहे हैं। वे न सिर्फ पढ़ाई में आगे थे, बल्कि सेवा भाव भी उनके स्वभाव में शुरू से रहा है। परिवार ने हर मोड़ पर उनका साथ दिया। माता-पिता, भाइयों और अन्य परिजनों के सहयोग, मार्गदर्शन और आशीर्वाद ने गुफरान के हौसले को हमेशा मजबूत बनाए रखा।
जैसे ही एफएमजीई परीक्षा का परिणाम सामने आया और गुफरान की सफलता की खबर मिली, घर में खुशी की लहर दौड़ गई। बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। रिश्तेदारों, दोस्तों और मोहल्ले के लोगों ने मिठाइयां बांटी और गुफरान को शुभकामनाएं दीं। क्षेत्रवासियों ने इसे नथमलपुर ही नहीं, पूरे गोरखपुर के लिए गर्व का पल बताया।
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स्थानीय बुद्धिजीवियों और युवाओं का कहना है कि गुफरान हाशमी की कहानी उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। लोगों ने ईश्वर से कामना की कि गुफरान आगे चलकर एक कुशल, ईमानदार और समाजसेवी चिकित्सक बनें और मानवता की सेवा करें। निस्संदेह, उनकी यह सफलता गोरखपुर के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।