इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- आपसी सहमति से फिजिकल होना अपराध नहीं, जानें किस मामले में कोर्ट ने सुनाया ये फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ किया है कि आपसी सहमति से बने रिश्ते के टूटने को धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता। नोएडा के एक मामले में कोर्ट ने धारा-69 के तहत दर्ज FIR को रद्द करते हुए अहम कानूनी व्याख्या दी।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 3 February 2026, 1:39 PM IST
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Noida: शादी के वादे, टूटते रिश्ते और फिर थाने तक पहुंचने वाले मामले आजकल आम होते जा रहे हैं। लेकिन हर टूटे रिश्ते को क्या धोखाधड़ी कहा जा सकता है? इसी सवाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम और दूरगामी असर वाली टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा है कि आपसी सहमति से बने फिजिकल रिलेशन को बाद में धोखाधड़ी नहीं ठहराया जा सकता। यह महज रिश्ता टूटने के बाद पैदा हुई निराशा हो सकती है, अपराध नहीं।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि बीएनएस की धारा-69 केवल उन्हीं मामलों में लागू होती है, जहां शुरू से ही धोखे की मंशा हो। अगर दोनों की सहमति से रिश्ता बना और बाद में किसी वजह से टूट गया तो उसे आपराधिक धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हर फेल हुआ रिश्ता कानूनन अपराध नहीं बन जाता।

क्या है धारा-69

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बीएनएस की धारा-69 का मकसद उन मामलों को दंडित करना है, जहां शादी का झूठा वादा कर केवल शारीरिक संबंध बनाए गए हों। इस धारा के तहत दोष साबित होने पर आरोपी को अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है। लेकिन इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी का शुरू से ही शादी करने का कोई इरादा नहीं था।

नोएडा का पूरा मामला

यह मामला नोएडा के सेक्टर-63 थाना क्षेत्र से जुड़ा है। 12 दिसंबर 2024 को एक युवती ने एक युवक के खिलाफ धमकी देने, मारपीट और शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में FIR दर्ज कराई थी। युवक ने इस FIR को रद्द कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।

सगाई से शादी की तारीख तक

युवक के वकील ने कोर्ट को बताया कि दोनों की मुलाकात जोधपुर में एलएलएम की पढ़ाई के दौरान हुई थी। दोस्ती आगे बढ़ी और शादी पर सहमति बनी। जून 2023 में दोनों की सगाई हुई और 12 नवंबर 2024 को शादी की तारीख भी तय कर दी गई थी। शादी की तैयारियों के सबूत के तौर पर होटल बुकिंग, कार्ड प्रिंटिंग और फोटोग्राफर की बुकिंग से जुड़े दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए।

कोर्ट का फैसला

जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अब्दुल शाहिद की खंडपीठ ने माना कि शादी का वादा वास्तविक था और बाद में परिस्थितियों के चलते रिश्ता टूटा। इसे पिछली तारीख से धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने धारा-69 के तहत दर्ज FIR को रद्द कर दिया। हालांकि धमकी, हमला और अन्य आरोपों की जांच जारी रखने के आदेश दिए गए हैं।

Location : 
  • Noida

Published : 
  • 3 February 2026, 1:39 PM IST

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