संजय गांधी हटा…‘पटना जू’ बना नया नाम, जानें सम्राट शासन में और क्या-क्या आया बदलाव?

बिहार सरकार के एक फैसले ने अचानक चर्चा का माहौल बना दिया है। पटना के मशहूर चिड़ियाघर समेत दो बड़े संस्थानों के नाम बदल दिए गए हैं, लेकिन इसके पीछे की वजहें कई सवाल खड़े कर रही हैं।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 30 April 2026, 9:42 AM IST
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Patna: बिहार सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए राज्य के दो प्रमुख संस्थानों के नाम बदल दिए हैं। राजधानी पटना स्थित प्रसिद्ध संजय गांधी बायोलॉजिकल पार्क को अब ‘पटना जू’ के नाम से जाना जाएगा। इसके साथ ही ‘संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी’ का नाम बदलकर ‘बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी’ कर दिया गया है। यह फैसला मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।

इतिहास से जुड़ी थी पुरानी पहचान

पटना का यह चिड़ियाघर वर्ष 1973 में आम लोगों के लिए खोला गया था और यह शहर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। करीब 153 एकड़ में फैले इस पार्क में 110 से अधिक प्रजातियों के 800 से ज्यादा वन्यजीव मौजूद हैं। वर्षों से यह स्थान संजय गांधी के नाम से जुड़ा हुआ था, लेकिन अब इसकी पहचान बदल दी गई है।

डेयरी संस्थान का नाम भी बदला

इसी तरह, 1980 में स्थापित डेयरी टेक्नोलॉजी संस्थान का नाम भी परिवर्तित किया गया है। यह संस्थान राज्य में डेयरी शिक्षा और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र है, जहां बीटेक और एमटेक जैसे पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। अब नए नाम के साथ इसे राज्य स्तरीय पहचान देने की कोशिश मानी जा रही है।

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सिर्फ नाम नहीं, कई बड़े फैसले भी

कैबिनेट बैठक में नाम परिवर्तन के अलावा कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। ‘मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना’ के तहत 23,165 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे उपभोक्ताओं को हर महीने 125 यूनिट मुफ्त बिजली मिलती रहेगी। इसके अलावा 208 ब्लॉकों में नए डिग्री कॉलेज खोलने और 9,152 पदों के सृजन का भी निर्णय लिया गया है।

शिक्षा, सड़क और स्वास्थ्य पर फोकस

राज्य सरकार ने हर ब्लॉक में मॉडल स्कूल स्थापित करने की योजना को भी मंजूरी दी है, जिसमें आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही चार बड़ी सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी दी गई है और पटना में एक प्रतिष्ठित फैशन संस्थान के लिए जमीन आवंटित की गई है। गर्दनीबाग में ऑटिज्म से पीड़ित लोगों के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने की भी योजना है।

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इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोग इसे प्रशासनिक बदलाव मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। खासकर पुराने नामों से जुड़ी ऐतिहासिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण यह निर्णय बहस का विषय बन गया है।

Location :  Patna

Published :  30 April 2026, 9:42 AM IST

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