यूपी विधानसभा का विशेष सत्र: महिला आरक्षण पर सियासी घमासान, कौन पड़ेगा भारी, सत्ता या विपक्ष?

यूपी विधानसभा के विशेष सत्र में आज महिला आरक्षण को लेकर सियासत गरमाने वाली है। सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, दोनों अपने-अपने दावे और आरोपों के साथ तैयार हैं। क्या यह सत्र कोई बड़ा फैसला लाएगा या सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा?

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 30 April 2026, 8:49 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश विधानमंडल का एक दिवसीय विशेष सत्र आज गुरुवार को आयोजित होने जा रहा है, जिसमें महिला आरक्षण और नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े मुद्दे केंद्र में रहेंगे। यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें भाजपा सरकार विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश करने जा रही है।

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना इस प्रस्ताव को विधानसभा में पेश करेंगे, जिसके बाद विभिन्न दलों के नेता और विधायक अपनी बात रखेंगे।

सरकार बनाम विपक्ष

भाजपा सरकार का आरोप है कि विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, महिला सशक्तीकरण के रास्ते में बाधा डाल रहे हैं। सरकार का कहना है कि लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक को पारित न होने देने के पीछे विपक्ष की रणनीति रही है। वहीं, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगा रहा है।

महिला मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की तैयारी

इस सत्र में महिला सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी जैसे अहम विषयों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। खास बात यह है कि महिला विधायकों को इस बार अधिक समय दिए जाने की योजना है, जिससे उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सदन को संबोधित करेंगे।

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विपक्ष की रणनीति भी तैयार

समाजवादी पार्टी ने पहले ही अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी ने 2023 की जनगणना के आधार पर महिला आरक्षण लागू करने की मांग उठाई है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में हुई बैठक में विधायकों को सदन में आक्रामक रुख अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। कांग्रेस भी विपक्ष के साथ मिलकर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जिससे सदन में हंगामे की आशंका बढ़ गई है।

सत्र में पेश होंगे कई अहम अध्यादेश

इस विशेष सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा, लेकिन कई महत्वपूर्ण अध्यादेश पेश किए जाएंगे, जिनमें राजस्व संहिता, निजी विश्वविद्यालय और दंड विधि से जुड़े संशोधन शामिल हैं। इसके अलावा, अगर कोई लंबित विधेयक हैं, तो उन्हें भी पुनः प्रस्तुत किया जा सकता है।

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2027 चुनावों से जुड़ी रणनीति?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विशेष सत्र 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। महिला वोट बैंक को साधने और विपक्ष को घेरने के लिए इस सत्र को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, विपक्ष इसे केवल एक राजनीतिक स्टंट बता रहा है।

हंगामे के आसार

सत्र के दौरान हंगामे और तीखी बहस की पूरी संभावना है। हालांकि, सभी दलों ने सदन की गरिमा बनाए रखने का आश्वासन दिया है, लेकिन राजनीतिक तापमान पहले से ही बढ़ा हुआ है।

Location :  Lucknow

Published :  30 April 2026, 8:49 AM IST

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