पश्चिमी सिंहभूम : 16 अगस्त को क्या होने वाला है झींकपानी में? एक नोटिस ने बढ़ा दी हजारों परिवारों की चिंता

पश्चिमी सिंहभूम के झींकपानी स्थित एसीसी लिमिटेड चाईबासा सीमेंट वर्क्स को 16 अगस्त 2026 से बंद करने की तैयारी शुरू हो गई है। कंपनी ने केंद्र सरकार को बंदी का नोटिस भेज दिया है। फैक्ट्री बंद होने से 74 कर्मचारियों की नौकरी पर असर पड़ेगा, जबकि स्थानीय लोगों ने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 16 June 2026, 11:39 PM IST
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West Singhbhum : जिले के झींकपानी में स्थित एसीसी लिमिटेड चाईबासा सीमेंट वर्क्स के बंद होने की खबर ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। करीब 80 वर्षों से संचालित यह औद्योगिक इकाई अब 16 अगस्त 2026 से बंद होने जा रही है। कंपनी ने इस संबंध में केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को औपचारिक नोटिस भेज दिया है। प्लांट बंद होने से सीधे तौर पर 74 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो जाएंगी, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

कंपनी ने बताए बंदी के कारण

एसीसी लिमिटेड की ओर से 15 जून को भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि प्लांट बंद करने का फैसला कई तकनीकी और आर्थिक कारणों की वजह से लिया गया है। कंपनी के अनुसार फैक्ट्री में उपयोग होने वाले चूना पत्थर यानी लाइमस्टोन का भंडार लगभग समाप्त हो चुका है। इसके अलावा क्लिंकर उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है और प्लांट की मशीनरी भी काफी पुरानी हो चुकी है। इन परिस्थितियों में उत्पादन जारी रखना व्यावहारिक नहीं रह गया है।

कर्मचारियों को मिलेगा नियमानुसार भुगतान

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि बंदी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारियों को श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सभी देय राशि और अन्य भुगतान नियमों के अनुसार किए जाएंगे। कंपनी का यह भी कहना है कि फैक्ट्री बंदी को लेकर किसी न्यायालय में कोई मामला लंबित नहीं है।

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फैसले के खिलाफ आंदोलन की तैयारी

फैक्ट्री बंद होने की सूचना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। एसीसी बचाओ संघर्ष समिति ने इस फैसले का विरोध करते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। समिति के संयोजक रमेश बालमुचू का कहना है कि क्षेत्र में अभी भी पर्याप्त मात्रा में लाइमस्टोन उपलब्ध है और आधुनिक तकनीक के जरिए उत्पादन जारी रखा जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो आर्थिक नाकाबंदी जैसे बड़े आंदोलन किए जाएंगे।

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र गोप ने कहा कि फैक्ट्री बंद होने से सिर्फ कर्मचारियों पर ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। स्थानीय दुकानदारों, ट्रांसपोर्टरों और मजदूरों की आय प्रभावित होगी। लोगों को यह भी चिंता है कि फैक्ट्री से जुड़ी पानी और बिजली जैसी सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें 16 अगस्त पर टिकी हैं, जबकि आंदोलनकारी संगठन फैक्ट्री बचाने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।

Location :  West Singhbhum

Published :  16 June 2026, 11:39 PM IST

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