देवघर: जल से बाहर आए 300 साल पुराने पाताल महादेव बाबा, दुर्लभ दर्शन के लिए उमड़े शिवभक्त

झारखंड के बाबा बासुकीनाथ धाम में शिवगंगा सरोवर की सफाई के दौरान वर्षों बाद जलमग्न रहने वाले स्वयंभू पाताल बाबा (पाताल महादेव) के दुर्लभ दर्शन श्रद्धालुओं को हो रहे हैं। शिवगंगा का पानी निकाले जाने से लगभग 15 फीट नीचे स्थित प्राचीन शिवलिंग दिखाई दिया है।

Updated : 10 June 2026, 6:36 PM IST
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Deoghar: झारखंड के प्रसिद्ध बाबा बासुकीनाथ धाम में इन दिनों आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है। वर्षों बाद शिवगंगा की सफाई के दौरान जलमग्न रहने वाले पाताल बाबा (पाताल महादेव) के दर्शन श्रद्धालुओं को हो रहे हैं। इस दुर्लभ अवसर की सूचना मिलते ही दूर-दराज से श्रद्धालुओं का सैलाब बासुकीनाथ पहुंचने लगा है।

मिली जानकारी के अनुसार शिवगंगा सरोवर की सफाई के लिए पानी निकाला गया है। सफाई के दौरान शिवगंगा की सतह से लगभग 15 फीट नीचे स्थित प्राचीन कुंड में विराजमान स्वयंभू पाताल महादेव के दर्शन संभव हो पाए हैं। आम दिनों में यह शिवलिंग और उससे जुड़ा पवित्र स्थल जल के भीतर रहता है, इसलिए भक्तों को इसके दर्शन नहीं हो पाते।

क्या है पाताल बाबा की मान्यता?

स्थानीय जनश्रुतियों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवगंगा के भीतर स्थित यह कुंड अत्यंत प्राचीन है। कहा जाता है कि लगभग 300 वर्ष पूर्व यहां स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ था, जिसे श्रद्धालु "पाताल बाबा" या "पाताल महादेव" के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि पाताल बाबा के दर्शन और पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवगंगा में पुनः जल भर जाने के बाद पाताल बाबा फिर से जल के भीतर समाधिस्थ हो जाएंगे और अगले कई वर्षों तक उनके दर्शन दुर्लभ हो जाएंगे। यही कारण है कि श्रद्धालु इस अवसर को हाथ से जाने नहीं देना चाहते।

दर्शन के लिए उमड़ रही भारी भीड़

पाताल बाबा के दर्शन की खबर फैलते ही दुमका, देवघर, जामताड़ा, गोड्डा सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बासुकीनाथ पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर और शिवगंगा क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। भक्त जल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

बाबा बैद्यनाथ यात्रा से भी जुड़ा है महत्व

धार्मिक परंपरा के अनुसार बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक श्रद्धालु बाबा बासुकीनाथ के दर्शन नहीं कर लेते। यही कारण है कि बासुकीनाथ धाम का महत्व शिवभक्तों के बीच विशेष माना जाता है।

नसीब वालों को मिलता है यह दुर्लभ अवसर

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों के अंतराल पर जब शिवगंगा की सफाई होती है, तभी पाताल बाबा के दर्शन संभव हो पाते हैं। इसलिए इसे अत्यंत दुर्लभ और सौभाग्यशाली अवसर माना जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि जिसे पाताल बाबा का दर्शन मिल जाए, उस पर भोलेनाथ की विशेष कृपा होती है।

जल के भीतर विराजमान पाताल महादेव के दर्शन के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़, आस्था और रहस्य का अनूठा संगम बना बासुकीनाथ!

Location :  Deoghar

Published :  10 June 2026, 6:36 PM IST

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