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सरोवर नगरी नैनीताल की सुबह अपने साथ एक अलग सी नर्मी लेकर आती है, जैसे पहाड़ खुद हर आने वाले मेहमान से कहना चाहते हों कि यहाँ की रफ्तार थोड़ी धीमी है, लेकिन सुकून बहुत गहरा। शहर के बीचोंबीच फैली नैनी झील इस कहानी की शुरुआत करती है। पढ़ें पूरी खबर
सरोवर नगरी नैनीताल
Nainital: सरोवर नगरी नैनीताल की सुबह अपने साथ एक अलग सी नर्मी लेकर आती है, जैसे पहाड़ खुद हर आने वाले मेहमान से कहना चाहते हों कि यहाँ की रफ्तार थोड़ी धीमी है, लेकिन सुकून बहुत गहरा। शहर के बीचोंबीच फैली नैनी झील इस कहानी की शुरुआत करती है। इसकी हल्की लहरों पर चलती नावें मानो उन यात्राओं का जश्न मनाती हैं, जिनमें लोग खुद को शहरों की भागदौड़ से खींचकर यहां तक ले आते हैं। झील के किनारे टहलते लोग, सूरज की परछाइयों का पानी पर गिरना और शाम को परावर्तित होती रोशनी, हर दृश्य किसी चित्रकार के कैनवास जैसा लगता है।
घुली शांति और घंटियों की आवाज़
झील के ठीक सामने स्थित नैना देवी मंदिर इस पहाड़ी शहर को आध्यात्मिक स्पर्श देता है। भक्त जब सीढ़ियां चढ़ते हैं, तो हवा में घुली शांति और घंटियों की आवाज़ उन्हें भीतर तक स्थिर कर देती है। स्थानीय लोग कहते हैं कि यह सिर्फ मंदिर नहीं, बल्कि नैनीताल का हृदय है, जहाँ हर इच्छा, हर प्रार्थना अपनी जगह पा लेती है।
शहर का एक अलग रूप
टहलते हुए जब कदम झील के साथ-साथ बनी माल रोड की तरफ बढ़ते हैं, तो शहर का एक अलग रूप सामने आता है। यहाँ दुकानों की खुशबू, मोमबत्तियों की हल्की रोशनी, लकड़ी की नक्काशी और पर्यटकों की हंसी ये सब मिलकर मॉल रोड को जीवंत बना देते हैं। कई लोग यहाँ सिर्फ खरीदारी के लिए नहीं, बल्कि उस पहाड़ी शाम को महसूस करने आते हैं, जहाँ सबकुछ धीमा, आरामदेह और बेहद अपनापन लिए होता है।
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सूर्यास्त हर दर्शनार्थी को मंत्रमुग्ध
ऊपर कहीं रोपवे से देखा जाने वाला स्नो व्यू प्वाइंट इस कहानी में रोमांच जोड़ देता है। जब कोई ऊपर पहुँचकर हिमालय की सफेद चोटियों को दूर चमकते देखता है, तो दिल में एकदम से ठंडा-मीठा सुकून उतर जाता है। इसके अलावा शहर से थोड़ा बाहर जाने पर एक और दुनिया मिलती है नीम करौली बाबा से जुड़ा शांत और मन को स्थिर करने वाला कैंची धाम यहाँ दूर-दूर से लोग आते हैं, कभी आस्था में डूबे, कभी अपने मन की उलझनों को सुलझाने की तलाश में। वहीं पहाड़ों के बीच स्थित हनुमानगढ़ी की पहाड़ी से दिखाई देने वाला सूर्यास्त हर दर्शनार्थी को मंत्रमुग्ध कर देता है। ऐसा लगता है मानो पूरा आकाश लाल और सुनहरे रंग में रंगकर दिन को विदा कर रहा हो।
शहर में मौजूद ईको केव गार्डन रोमांच की झलक दिखाते हैं। संकरी गुफाएं, ऊँचाई-नीचाई वाले रास्ते, और बच्चों की हँसी सब मिलकर इसे परिवारों के लिए एक मज़ेदार अनुभव बनाते हैं।
पहाड़ी हस्तशिल्प की रंगीन दुनिया देखने को मिलती
वहीं पास ही बसी भोटिया मार्केट में तिब्बती कपड़ों और पहाड़ी हस्तशिल्प की रंगीन दुनिया देखने को मिलती है। और अगर कोई प्रकृति की गहराई में उतरना चाहे, तो थोड़ी दूरी पर फैला जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क उसे जंगलों के रहस्य सुनाने के लिए तैयार खड़ा मिलता है। यहाँ की खामोशी, पेड़ों की ऊँचाई, और कभी-कभार दिखाई दे जाने वाले जंगली जानवर इन सबमें एक अनकही कहानी छिपी होती है। नैनीताल सिर्फ पहाड़ों का शहर नहीं, यह उन भावनाओं का मेल है जो हर यात्री अपने साथ लेकर जाता है। कोई यहाँ सुकून ढूंढता है, कोई रोमांच, कोई स्वाद, कोई आस्था और शहर हर किसी को कुछ न कुछ देकर ही विदा करता है। यहाँ की हवा में एक अपनापन है, जो हर बार कहता है एक बार फिर आना।