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रुद्रप्रयाग के सिन्द्रवाणी क्षेत्र में देर रात वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में गुलदार कैद हुआ है। 3 जनवरी को बच्चे की मौत के बाद क्षेत्र में दहशत थी। गुलदार को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा।
सिन्द्रवाणी क्षेत्र में गुलदार पिंजरे में कैद
Rudraprayag: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद के सिन्द्रवाणी क्षेत्र में बीते कई दिनों से दहशत का कारण बने गुलदार को देर रात्रि वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद कर लिया गया है। यह सफलता उस दुखद घटना के बाद मिली है, जिसमें 3 जनवरी को सिन्द्रवाणी गांव में पांच वर्षीय बच्चे को गुलदार ने अपना निवाला बना लिया था। इस घटना के बाद से ही पूरे इलाके में भय और तनाव का माहौल बना हुआ था।
3 जनवरी की घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश और डर देखा गया। अभिभावक अपने बच्चों को घरों से बाहर भेजने से कतरा रहे थे और शाम होते ही गांवों में सन्नाटा पसर जाता था। लगातार गुलदार की गतिविधियों की सूचना मिलने से क्षेत्र में भय का माहौल और गहरा गया था।
घटना के बाद जिला प्रशासन और वन विभाग हरकत में आया। सिन्द्रवाणी और आसपास के क्षेत्रों में गुलदार की गतिविधियों को देखते हुए अलग-अलग स्थानों पर कई पिंजरे लगाए गए। इसके साथ ही कैमरा ट्रैप और अन्य तकनीकी उपकरणों की मदद से गुलदार की निगरानी शुरू की गई।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार बीती रात करीब 10 बजे ककोड़ाखाल के समीप लगाए गए पिंजरे में एक गुलदार कैद हो गया। गुलदार के पिंजरे में कैद होने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित किया गया।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि पिंजरे में कैद हुआ गुलदार वही है, जिसने बच्चे पर हमला किया था। इसके लिए गुलदार को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि यह वही गुलदार है या कोई अन्य।
अगस्त्यमुनि रेंज के उप वनाधिकार देवेंद्र सिंह पुण्डीर ने बताया कि देर रात्रि एक गुलदार पिंजरे में कैद हुआ है। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह गुलदार घटना में शामिल था या नहीं।
वन विभाग ने यह भी साफ किया है कि सिन्द्रवाणी क्षेत्र में फिलहाल सर्च अभियान बंद नहीं किया जाएगा। अन्य पिंजरे, कैमरा ट्रैप और निगरानी उपकरणों के माध्यम से लगातार नजर रखी जाएगी, ताकि क्षेत्र में मौजूद किसी अन्य गुलदार की गतिविधियों पर भी नियंत्रण किया जा सके।
गुलदार के पिंजरे में कैद होने के बाद ग्रामीणों ने कुछ हद तक राहत की सांस ली है, लेकिन प्रशासन और वन विभाग ने लोगों से अभी भी सतर्क रहने की अपील की है। ग्रामीणों को रात के समय अकेले बाहर न निकलने और बच्चों पर विशेष निगरानी रखने की सलाह दी गई है।
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प्रशासन ने कहा है कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक क्षेत्र में गश्त और निगरानी जारी रहेगी। ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।