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नैनीताल की मल्लीताल खीर में पांच तरह के चावल, दूध और ड्राईफ्रूट्स से बनी पारंपरिक मिठास। कुल्हड़ में परोसी यह खीर स्वाद, स्वास्थ्य और पहाड़ी संस्कृति का अद्भुत संगम पेश करती है।
नैनीताल की पहाड़ी खीर (Img- Internet)
Nainial: सरोवर नगरी नैनीताल की गलियों में सर्द हवा के बीच एक खास खुशबू घुली रहती है, जो दूध, चावल और सूखे मेवे की है। पर्यटक पहाड़ की मिठास का अनुभव लेने दूर-दूर से आते हैं और सबसे पहले मल्लीताल के नेगी रेस्टोरेंट का रुख करते हैं। यहां की पहाड़ी खीर अपने स्वाद और विशिष्टता के लिए पहचानी जाती है।
इस खीर की खासियत केवल स्वाद में ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य में भी है। इसे पांच तरह के चावलों से बनाया जाता है: सादा चावल, झुंगरा, पहाड़ी तिलक, ऑर्गेनिक ब्लैक राइस और ब्राउन राइस। ठंडे मौसम में गरम तासीर वाली खीर अधिक पसंद की जाती है, जबकि गर्मियों में इसे ठंडा करके भी परोसा जाता है।
गोपाल नेगी, जिन्होंने पिछले 15 सालों से यह खीर बनाई है, बताते हैं कि इसकी तैयारी बेहद ध्यान और समय मांगती है। सबसे पहले चावल को पानी में उबालकर नरम किया जाता है। फिर इसे धीरे-धीरे दूध में पकाया जाता है। इसके बाद घी और चिरौंजी मिलाकर कुछ देर पकाया जाता है। अंत में चीनी और ड्राईफ्रूट्स डालकर 20-25 मिनट तक पकाया जाता है।
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तैयार खीर को पारंपरिक कुल्हड़ में परोसा जाता है और ऊपर से ड्राईफ्रूट्स से सजाया जाता है। कुल्हड़ में खीर का एक कप 40 रुपये में उपलब्ध है। कुल्हड़ में परोसने का अंदाज इसे और भी खास बनाता है, क्योंकि इससे खीर का स्वाद और ठंडक में भी पहाड़ी अनुभव जुड़ जाता है।\
प्रसिद्ध दुकान (Img- Internet)
हर घूँट में इस खीर में पहाड़ की मिट्टी की खुशबू और ठंडी हवाओं का एहसास झलकता है। पर्यटक इसे चखने के बाद बार-बार लौटकर आते हैं। यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि पहाड़ की आत्मा का अनुभव बन चुकी है।
नैनीताल की यह खीर उन यादों का हिस्सा बन चुकी है, जिन्हें लोग अपने साथ ले जाते हैं। इसका स्वाद हर बार पहाड़ की सैर की याद दिलाता है। रेस्टोरेंट और खीर के इस अनुभव ने नैनीताल की संस्कृति और पर्यटन में अपनी खास जगह बना ली है।
स्थानीय लोग भी इस खीर को पसंद करते हैं, क्योंकि यह पारंपरिक स्वाद और पोषण का संगम है। पर्यटक इसे चखते समय पहाड़ की ठंडी हवा और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव भी प्राप्त करते हैं। यह खीर नैनीताल का एक ऐसा प्रतीक बन गई है जो स्वाद, स्वास्थ्य और पहाड़ी संस्कृति का मेल है।