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अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर नैनीताल में एक बार फिर जनाक्रोश सड़कों पर दिखा। पंत पार्क से गांधी चौक तक निकले कैंडल मार्च में हजारों लोगों ने भाग लेकर न्यायिक निगरानी और CBI जांच की मांग दोहराई।
न्याय की मांग में फिर एकजुट हुआ नैनीताल
Nainital: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर नैनीताल में मंगलवार शाम एक बार फिर न्याय की आवाज बुलंद हुई। शहर मोमबत्तियों की रोशनी में उस बेटी के लिए इंसाफ मांगता नजर आया, जिसने अन्याय और क्रूरता का शिकार होकर अपनी जान गंवाई। लोगों के हाथों में जलती मोमबत्तियां और आंखों में आक्रोश साफ झलक रहा था।
कैंडल मार्च की शुरुआत मल्लीताल स्थित पंत पार्क से हुई, जो तल्लीताल गांधी चौक तक पहुंचा। पूरे मार्ग में “अंकिता को न्याय दो”, “दोषियों को फांसी दो” और “बेटी बचाओ, बेटी को न्याय दो” जैसे नारों से शहर गूंजता रहा। मार्च में युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
मार्च के दौरान माहौल पूरी तरह भावनात्मक रहा। लोगों के चेहरों पर ग़म, आक्रोश और न्याय की दृढ़ मांग साफ नजर आ रही थी। हर कोई यही कहता दिखा कि अब और इंतजार नहीं किया जाएगा और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
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कैंडल मार्च में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के साथ कई वरिष्ठ कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी शामिल हुए। नेताओं ने जनता के साथ कदम से कदम मिलाकर मार्च किया और सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की। उनकी मौजूदगी से आंदोलन को और बल मिला।
नैनीताल में उमड़ा जनसैलाब
कैंडल मार्च के बाद गांधी चौक पर एक सभा का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह मामला केवल एक हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों से जुड़ा हुआ गंभीर सवाल है। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में न्याय नहीं मिला, तो यह पूरे समाज के लिए खतरनाक संकेत होगा।
सभा के दौरान लोगों ने एक स्वर में जांच को न्यायाधीश की निगरानी में कराने और सीबीआई जांच की मांग दोहराई। वक्ताओं का कहना था कि जब तक जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं होगी, तब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल सकता।
सभा में मौजूद लोगों ने साफ शब्दों में कहा कि उत्तराखंड की जनता दोषियों को बचाने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं करेगी। यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। लोगों ने सरकार से जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित करने की मांग की।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने मोमबत्तियां जलाकर अंकिता को श्रद्धांजलि दी और न्याय की इस लड़ाई को जारी रखने का संकल्प लिया। शहर में यह संदेश साफ था कि जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक आवाज उठती रहेगी।