हिंदी
देहरादून के जोली ग्रांट में बनी वन अनुसंधान रेंज अब पर्यटकों के आकर्षण का नया केंद्र बनती जा रही है। यहां दुर्लभ पेड़-पौधों और नॉर्थ ईस्ट की अनोखी वनस्पतियों ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। लेकिन क्या खास चीजें हैं जो इसे अन्य जगहों से अलग बनाती हैं?
देहरादून में अनोखा इको-पार्क (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Dehradun: डोईवाला स्थित जोली ग्रांट क्षेत्र में वन विभाग द्वारा विकसित वन अनुसंधान रेंज इन दिनों पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनती जा रही है। प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता से भरपूर यह स्थान न केवल स्थानीय लोगों बल्कि बाहरी पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। करीब तीन हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह पार्क पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक अनोखा अनुभव प्रदान करता है।
इस वन अनुसंधान रेंज की सबसे बड़ी खासियत यहां मौजूद दुर्लभ और विशेष प्रजातियों के पेड़-पौधे हैं। पार्क में ऐसे कई पौधे लगाए गए हैं जो सामान्यतः उत्तराखंड में नहीं पाए जाते। इन पौधों के माध्यम से पर्यटकों को देश के विभिन्न हिस्सों की वनस्पतियों को करीब से देखने और समझने का अवसर मिल रहा है।
वन विभाग ने इस पार्क को और भी खास बनाने के लिए नॉर्थ ईस्ट भारत की वनस्पतियों को भी यहां स्थापित किया है। इससे लोगों को भारत की विविध जैविक संपदा का व्यापक अनुभव मिलता है। यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि पर्यावरण शिक्षा को भी मजबूत कर रही है।
इस पार्क में पौधरोपण के लिए आधुनिक और नई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इन तकनीकों की मदद से पौधों की बेहतर वृद्धि और संरक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। वन विभाग का उद्देश्य है कि यहां लगाए गए पौधे लंबे समय तक सुरक्षित रहें और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में योगदान दें।
Dehradun: डोईवाला में किसान यूनियन में उबाल, आंदोलन की दी चेतावनी
वन अनुसंधान रेंज को खास तौर पर शैक्षणिक और जागरूकता के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यहां आने वाले लोगों को पेड़-पौधों के महत्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाता है। स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए भी यह स्थान एक जीवंत प्रयोगशाला के रूप में उभर रहा है।
वन अनुसंधान रेंज से जुड़े राजकुमार ने बताया कि पेड़-पौधों का मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को प्रकृति के महत्व को समझना चाहिए और उसके संरक्षण में अपनी भागीदारी निभानी चाहिए। विभाग का प्रयास है कि यह संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।
गौरतलब है कि इस वन अनुसंधान रेंज की स्थापना वर्ष 2022-23 में की गई थी। तब से यह क्षेत्र धीरे-धीरे पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है। आने वाले समय में यह स्थान पर्यावरण शिक्षा और इको-टूरिज्म का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है, जो उत्तराखंड के पर्यटन को नई दिशा देगा।