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डोईवाला क्षेत्र
Doiwala: उत्तराखंड के डोईवाला क्षेत्र में बीते दो दिनों से हो रही लगातार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। विशेष रूप से गेहूं की खेती करने वाले किसान इस बेमौसम बदलाव से गहरे सदमे में हैं, क्योंकि अगले 15 से 20 दिनों में फसल पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार होने वाली थी। खेतों में खड़ी लहलहाती गेहूं की फसल तेज हवाओं के दबाव को नहीं झेल सकी और पूरी तरह जमीन पर बिछ गई है।
स्थानीय किसान दरपान बोरा के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा ने लगभग 50% किसानों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है, जिससे अब फसल की उपज और दाने की चमक व गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ने की पूरी आशंका है। पीड़ित किसानों ने अब सरकार से गुहार लगाई है कि उनकी बर्बादी का उचित आंकलन कर जल्द से जल्द आर्थिक भरपाई की जाए।
फसल के गिरने से पैदावार में होने वाली कमी को लेकर कृषि विशेषज्ञ भी चिंतित नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञ देवेंद्र सिंह असवाल ने बताया कि वर्तमान में गेहूं की जो स्थिति है, उसमें दाने के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सबसे बड़ी चिंता आने वाले दिनों के मौसम को लेकर है; यदि एक बार फिर मौसम करवट बदलता है और क्षेत्र में ओलावृष्टि (Hailstorm) होती है, तो गेहूं की बची-कुची फसल को भी भारी नुकसान पहुँचेगा।
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ओले गिरने से न केवल खड़ी फसल बर्बाद होगी बल्कि दाने भी झड़ जाएंगे, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत मिट्टी में मिल सकती है। फिलहाल आसमान में छाये बादलों ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
एक तरफ जहाँ गेहूं के लिए यह बारिश आफत बनकर आई है, वहीं दूसरी ओर गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। चूंकि गन्ना अभी खेतों में छोटे पौधों के रूप में है, इसलिए यह हल्की और मध्यम बारिश उसकी बेहतर ग्रोथ के लिए बहुत लाभदायक मानी जा रही है।
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विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह मौसम बागवानी (Horticulture) करने वाले किसानों के लिए भी फिलहाल फायदेमंद है। हालांकि, बागवानी के क्षेत्र में भी एक बड़ा जोखिम बना हुआ है—यदि बारिश के साथ ओलावृष्टि या अत्यधिक तेज हवाएं चलती हैं, तो फलदार पेड़ों और फूलों को भी नुकसान पहुँचने की प्रबल संभावना है।
Location : Doiwala
Published : 21 March 2026, 5:27 PM IST
Topics : Crop Loss 2026 Doiwala news Farmers Compensation Unseasonal Rain Uttarakhand Wheat Crop Damage