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पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों के कारण खेती छोड़ रहे किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर! पौड़ी में 102 परियोजनाओं के जरिए बदली गई खेती की सूरत। आखिर कैसे 339 लाख रुपये के निवेश ने सुरक्षित की सैकड़ों हेक्टेयर फसल? विस्तार से जानें।
घेरबाड़ योजना
Paudi : पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले भारी नुकसान से परेशान किसानों के लिए कृषि विभाग की घेरबाड़ योजना एक अत्यंत प्रभावी समाधान बनकर उभरी है। जिला योजना के अंतर्गत जनपद के विभिन्न विकासखंडों में कराए गए इस फेंसिंग कार्य से अब बड़ी संख्या में किसानों की कृषि भूमि पूरी तरह सुरक्षित हो गई है।
जंगली सूअर, बंदर और अन्य वन्यजीवों के डर के बिना अब किसान अपनी मेहनत से तैयार फसलों को बचाने में सफल हो रहे हैं, जिससे न केवल उन्हें आर्थिक राहत मिली है बल्कि खेती के प्रति उनका उत्साह और आत्मविश्वास भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है।
वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान कृषि विभाग ने रणनीतिक रूप से जनपद में कुल 102 परियोजनाओं के माध्यम से घेरबाड़ का कार्य संपन्न कराया है। इन सभी परियोजनाओं के लिए कुल 339 लाख रुपये की लागत स्वीकृत की गई थी, जिसके तहत चयनित गांवों में खेतों के चारों ओर मजबूत और टिकाऊ फेंसिंग लगाई गई है।
इस योजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके माध्यम से कुल 339 हेक्टेयर कृषि भूमि को सुरक्षित घेरे में लाया गया है, जिससे किसानों को अब दिन-रात खेतों की निगरानी करने की थका देने वाली मजबूरी से मुक्ति मिल गई है।
प्रभारी कृषि अधिकारी मनविंदर कौर ने जानकारी दी कि घेरबाड़ का यह महत्वपूर्ण कार्य जनपद के एकेश्वर, जयहरीखाल, पोखड़ा, थलीसैंण, खिर्सू, पाबौ, रिखणीखाल, नैनीडांडा, बीरोंखाल, पौड़ी, कोट, कल्जीखाल, दुगड्डा, द्वारीखाल और यमकेश्वर जैसे प्रमुख विकासखंडों के चयनित गांवों में किया गया है।
अधिकांश परियोजनाओं में लगभग 3 से 6 लाख रुपये तक की लागत लगाकर खेतों के चारों ओर ऐसी मजबूत घेराबंदी की गई है जो वन्यजीवों के प्रवेश को रोक सके। इस पहल ने उन किसानों के लिए खेती को फिर से सुगम बना दिया है जो पहले जानवरों के आतंक के कारण खेती छोड़ने पर मजबूर हो रहे थे।
बीरोंखाल विकासखंड के ग्राम नौगांव की सुशीला देवी, बिक्रम सिंह, जयपाल सिंह और नरेंद्र सिंह सहित अन्य किसानों ने इस योजना के लाभों को साझा करते हुए बताया कि 130 मीटर लंबी घेरबाड़ से उनके लगभग 80 खेतों को सुरक्षा मिली है। फेंसिंग होने के बाद से न केवल जंगली जानवरों का हस्तक्षेप कम हुआ है, बल्कि फसलों के उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। अन्य विकासखंडों के किसानों ने भी कृषि विभाग की इस जमीनी पहल की सराहना करते हुए इसे पर्वतीय कृषि के संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम बताया है।
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने स्पष्ट किया कि जनपद के पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों की समस्या को देखते हुए जिला योजना के तहत घेरबाड़ को प्राथमिकता दी जा रही है। जहाँ भी यह कार्य पूरा हो चुका है, वहाँ किसान अब अधिक निडर होकर और आत्मविश्वास के साथ उन्नत खेती कर पा रहे हैं, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि की प्रबल संभावनाएं बनी हैं।
उन्होंने आश्वासन दिया है कि किसानों की बढ़ती माँग और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भविष्य में अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी घेरबाड़ के कार्य कराए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को खेती से लाभकारी जोड़ा जा सके।