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डोईवाला में शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को शहीद दिवस पर श्रद्धांजलि दी गई। गुरुद्वारा सिंह सभा और स्थानीय लोगों ने पुष्प अर्पित कर वीरों के बलिदान को याद किया और देशभक्ति का संदेश दिया।
शहीद दिवस पर डोईवाला में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भावपूर्ण श्रद्धांजलि
Dehradun: आज 23 मार्च को पूरे देश में शहीद दिवस मनाया जा रहा है। इसी क्रम में उत्तराखंड के डोईवाला में भी देश के महान क्रांतिकारियों शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। डोईवाला स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर वीर शहीदों को पुष्प अर्पित कर नमन किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने शहीदों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को याद करते हुए देशभक्ति के नारे लगाए। इस अवसर पर माहौल पूरी तरह देशभक्ति से ओतप्रोत नजर आया। लोगों ने कहा कि इन तीनों वीर सपूतों ने अपनी जान की परवाह किए बिना देश की आजादी के लिए जो बलिदान दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत रहेगा।
साल 1931 में आज ही के दिन भारत माता के इन तीन वीर सपूतों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगाया था। उनका यह बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उनके बलिदान ने न केवल देशवासियों के दिलों में आजादी की अलख जगाई, बल्कि युवाओं को भी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर शहीद भगत सिंह के विचारों और उनकी क्रांतिकारी सोच को भी याद किया गया। भगत सिंह द्वारा कही गई प्रसिद्ध पंक्ति “दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उल्फत मेरी, मिट्टी से भी खुशबू ए वतन आएगी” ने उपस्थित लोगों के मन में देशभक्ति की भावना को और प्रबल कर दिया। वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह की सोच ने उस समय के युवाओं में ऐसी ऊर्जा पैदा की, जिससे ब्रिटिश हुकूमत भी भयभीत हो उठी थी।
डोईवाला स्थित शहीद भगत सिंह चौक पर भी सुबह 9 बजे श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, जहां स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और युवाओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर शहीदों को नमन किया। इसके बाद डोईवाला गुरुद्वारे में गुरुद्वारा सिंह सभा द्वारा विशेष कीर्तन और पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि शहीदों का बलिदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह आज भी देशभक्ति की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और देश के विकास में योगदान दें।
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पूरे कार्यक्रम के दौरान “इंकलाब जिंदाबाद” और “भारत माता की जय” के नारों से वातावरण गूंज उठा। अंत में सभी ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।