नैनीताल के जंगलों में रंगीन परिंदों की एंट्री, विदेशी पक्षियों की चहल-पहल बढ़ी

नैनीताल की सर्दियों में नयना देवी हिमालयन बर्ड कंजर्वेशन रिजर्व प्रवासी और देशी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना बन जाता है। साइबेरिया और मध्य एशिया से आए रंग-बिरंगे पक्षी, शांत जंगल और पहाड़ों की गोद में बसा यह रिजर्व बर्ड वॉचिंग और ईको-टूरिज्म के लिए खास पहचान बना रहा है।

Nainital: शांत वादियों में जैसे ही सर्दियों का आगमन होता है। पूरा इलाका एक अलग ही रंग में रंग जाता है। तापमान गिरते ही सरोवर नगरी के जंगलों में हलचल बढ़ जाती है। प्रकृति प्रेमियों और बर्ड वॉचिंग के शौकीनों को अपनी ओर खींच लेती है। खास तौर पर नयना देवी हिमालयन बर्ड कंजर्वेशन रिजर्व इस मौसम में किसी रंगीन कैनवास की तरह नजर आने लगता है। साइबेरिया, मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे इलाकों से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर आने वाले प्रवासी पक्षी यहां की वादियों को जीवंत बना देते हैं।

सुकून का एहसास

नैनीताल से पंगोट की ओर बढ़ते ही घने बांज और देवदार के जंगलों के बीच बसा यह रिजर्व एक अलग ही सुकून का एहसास कराता है। ऊंचे पहाड़ी ढलान, प्राकृतिक जलस्रोत और जंगलों का गहरा सन्नाटा इन सबके बीच सुबह और शाम पक्षियों की चहचहाहट ऐसा दृश्य रचती है। यह किसी को भी प्रकृति की गोद में ले जाने के लिए काफी है। यही वजह है कि सर्दियों के मौसम में यहां बर्ड वॉचिंग का अनुभव और भी खास हो जाता है।

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देशी और प्रवासी पक्षी

इस सीजन में रिजर्व क्षेत्र में करीब 350 से अधिक प्रजातियों के देशी और प्रवासी पक्षी देखे जा सकते हैं। रेडस्टार्ट, ग्रे वैगटेल, ब्राउन डिपर, पाइड किंगफिशर और बार-हेडेड गूज जैसे आकर्षक पक्षी अक्सर नजर आते हैं। इसके अलावा लाफिंग थ्रश, चीयर फीजेंट, हिमालयन वुड आउल और ग्रॉसबीक जैसी दुर्लभ हिमालयी प्रजातियां भी सर्दियों में यहां दिखाई देती हैं।

पक्षी की असली पहचान

स्थानीय बर्ड वॉचर और गाइड जगजीवन सिंह धामी बताते हैं कि नयना देवी रिजर्व की खूबसूरती इसकी प्राकृतिक बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां आने वाले अनगिनत पक्षी इसकी असली पहचान हैं। उनका कहना है कि घुमावदार पहाड़ी रास्तों पर चलते हुए हर मोड़ पर कोई न कोई नई प्रजाति देखने को मिल जाती है। इस जगह को और खास बना देती है।

पक्षियों को देखने का मौका

जगजीवन बताते हैं कि सर्दियों के मौसम में आईब्राउड थ्रश, विनिशियस रोज़ फिंच, ब्लैक थ्रोटेड एक्सेंटर, पिंक ब्राउड रोज़फिंच, लेसर रैकेट-टेल्ड ड्रोंगो और हिमालयन रूबीथ्रोट जैसे दुर्लभ पक्षियों को देखने का मौका मिलता है। इन पक्षियों की एक झलक पाने के लिए देश-विदेश से फोटोग्राफर यहां पहुंचते हैं।

ईको-टूरिज्म को बढ़ावा

सर्दियों में पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिल रहा है। जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। जगजीवन बताते हैं कि नैनीताल और आसपास के इलाकों में बर्ड वॉचिंग की परंपरा अंग्रेजों के समय से चली आ रही है लेकिन अब युवा इसे एक पेशे के रूप में भी अपना रहे हैं। वह अपनी संस्था ‘पंचाचुली बॉटनिकल्स’ के जरिए न केवल जड़ी-बूटियों के संरक्षण पर काम कर रहे हैं, बल्कि पर्यटकों को बर्ड वॉचिंग का अनोखा अनुभव भी प्रदान कर रहे हैं। उनसे इंस्टाग्राम पेज ‘Saga_Of_Earth’ के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है।

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बर्ड वॉचिंग का समय

बर्ड वॉचिंग के समय की बात करें तो गर्मियों में यह सुबह 6:30 बजे से दोपहर 11 बजे तक और शाम के समय होती है, जबकि सर्दियों में यह सत्र सुबह 7:30 बजे से शुरू होता है। रिजर्व में प्रवेश के लिए 50 रुपये का शुल्क लिया जाता है। यह साफ-सफाई और संरक्षण गतिविधियों में खर्च किया जाता है। यही कारण है कि अब हर दिन बड़ी संख्या में पर्यटक इस सेंचुरी का रुख कर रहे हैं।

नैनीताल घूमने की योजना

अगर आप सर्दियों में नैनीताल घूमने की योजना बना रहे हैं तो नयना देवी हिमालयन बर्ड कंजर्वेशन रिजर्व को अपनी यात्रा सूची में जरूर शामिल करें। शांत जंगल, रंग-बिरंगे पक्षी और प्रकृति की गूंज के बीच बिताया गया यह अनुभव आपकी यात्रा को बेहद खास बना देगा।

Location : 
  • नैनीताल

Published : 
  • 22 January 2026, 3:33 AM IST

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