नैनीताल में आखिर क्यों नहीं हो रही बर्फबारी, वैज्ञानिकों ने बताई वजह

नैनीताल में इस साल बर्फबारी न होने से वैज्ञानिक और स्थानीय लोग चिंतित हैं। एरीज की स्टडी के मुताबिक जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और कमजोर पश्चिमी विक्षोभ इसकी बड़ी वजह हैं।

Nainital: सरों की नगरी नैनीताल, जहां सर्दियों में बर्फ से ढकी पहाड़ियां और ठंडी हवाएं पहचान हुआ करती थीं। इस बार बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है। जनवरी और फरवरी बीतने को हैं लेकिन अब तक शहर और आसपास की पहाड़ियों पर बर्फबारी का नामोनिशान नहीं है। न स्थानीय लोगों को बर्फ देखने को मिली और न ही पर्यटकों की वह उम्मीद पूरी हो पाई। जिसके लिए वे दूर-दूर से नैनीताल पहुंचते हैं। लगातार सूखी सर्दियों ने अब यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नैनीताल में बर्फबारी धीरे-धीरे इतिहास बनती जा रही है।

वैज्ञानिक भी चिंतित

नैनीताल में इस बार बर्फबारी न होने को लेकर वैज्ञानिक भी चिंतित हैं। नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान यानी एरीज के वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन है। संस्थान की हालिया स्टडी के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में पश्चिमी विक्षोभ की ताकत लगातार कमजोर होती जा रही है। पहले यही पश्चिमी विक्षोभ लंबे समय तक सक्रिय रहते थे और पर्याप्त नमी लेकर आते थे। जिससे पहाड़ों में जमकर बर्फ गिरती थी। अब स्थिति यह है कि ये विक्षोभ या तो जल्दी गुजर जाते हैं या फिर बर्फबारी के लिए जरूरी नमी नहीं ला पाते।

तापमान में बढ़ोतरी

इसके साथ ही तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी भी बर्फबारी के रास्ते में बड़ी बाधा बन रही है। सर्दियों में नैनीताल का न्यूनतम तापमान अब उस स्तर तक नहीं गिर पा रहा। जहां बर्फ जम सके। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस बार जनवरी में भी दिन और रातें सामान्य से ज्यादा गर्म रहीं। कभी जिन दिनों में पाला पड़ता था और तेज ठंडी हवाएं चलती थीं। अब वही समय हल्की ठंड में ही निकल जा रहा है।

नैनीताल की ऊंचाई

एरीज के शोध में यह भी सामने आया है कि आने वाले समय में 2 हजार मीटर से कम ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और कम हो जाएगी। नैनीताल की ऊंचाई करीब 2 हजार मीटर है। ऐसे में वैज्ञानिकों का अनुमान है कि भविष्य में यहां बर्फ गिरना बेहद दुर्लभ हो सकता है। पिछले कई सालों का मौसम भी इसी बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।

तेजी से बढ़ रहे हैं दोनों तापमान

एरीज के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह बताते हैं कि हिमालयी क्षेत्र में अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान तेजी से बढ़ रहे हैं। तापमान बढ़ने से जो थोड़ी बहुत बर्फ गिरती भी है। वह जल्दी पिघल जाती है। जंगलों में आग, वनस्पति का घटता क्षेत्र और नमी सोखने वाली घास का खत्म होना भी स्थानीय मौसम को अस्थिर बना रहा है। बढ़ता कार्बन उत्सर्जन इस पूरी प्रक्रिया को और तेज कर रहा है।

बर्फबारी के लिए जरूरी

वैज्ञानिकों के अनुसार, बर्फबारी के लिए जरूरी है कि जमीन का तापमान लगातार 48 घंटे तक करीब 4 डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे रहे और साथ में मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो। अब ऐसी परिस्थितियां बनना मुश्किल होता जा रहा है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो नैनीताल जैसे पर्यटन स्थलों पर सर्दियों का आकर्षण फीका पड़ सकता है। इसका असर पर्यटन के साथ-साथ जल स्रोतों और पर्यावरण पर भी साफ दिखेगा।

Location : 
  • Nainital

Published : 
  • 22 January 2026, 2:58 AM IST

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