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सालों से फरार चल रहा 50 हजार का इनामी अपराधी अमित शर्मा उर्फ गोल्डी आखिरकार STF के हत्थे चढ़ गया। सूचना मिलने पर टीम ने बुलंदशहर के खुर्जा इलाके में घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार किया।
उत्तराखंड में नए नियम (Img: Google)
Dehradun: राज्य में समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) अध्यादेश, 2026 लागू हो गया है। अब अपनी पहचान छिपाकर शादी करने वाले सीधे जेल की सलाखों के पीछे जाएंगे। इसके साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप के नियम भी सख्त कर दिए गए हैं।
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समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को और अधिक प्रभावी और सख्त बनाने के उद्देश्य से राज्य की धामी सरकार ने बड़ी पहल की है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश को मंजूरी दिए जाने के साथ ही राज्य में विवाह, पंजीकरण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गए हैं।
नए नियमों के अनुसार अब यदि विवाह का कोई भी पक्षकार अपनी पहचान के विषय में गलत जानकारी देता है, तो इसे विवाह शून्य करने का आधार माना जाएगा। इसके साथ ही, अपनी पहचान या वैवाहिक स्थिति छिपाकर शादी करने वाले व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी।
लिव-इन रिलेशनशिप में क्यों होगी सात साल की सजा ?
समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर सख्त प्रावधान जोड़े गए हैं। यदि कोई व्यक्ति बल, दबाव या धोखाधड़ी के बल पर लिव-इन रिलेशनशिप बनाता है, तो उसे सात साल तक के कारावास और जुर्माने की सजा होगी।
धारा 380 (2) के उल्लंघन जैसे खून के रिश्तों या प्रतिबंधित श्रेणियों में लिव-इन में रहने पर भी सात साल की जेल का प्रावधान है।
किसी वयस्क द्वारा नाबालिग के साथ लिव-इन में रहने पर छह माह की जेल और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
लिव-इन संबंध समाप्त होने पर अब निबंधक की ओर से दोनों पक्षों को निर्धारित प्रपत्र में प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा।
विवाह, तलाक या लिव-इन के पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति महानिबंधक के पास होगी। हालांकि इससे पहले संबंधित पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।