सेना का जवान निकला महाठग: फर्जी भर्ती के नाम पर बेची खुद की ID, खाते में मिले 2.12 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजैक्शन

सेना के भगोड़े जवान बाबूलाल गोरे के खिलाफ फर्जी भर्ती और सैन्य पहचान पत्र बेचने के आरोप में जीरो FIR दर्ज की गई है। जवान के बैंक खाते से 2.12 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है। मामले की जांच पिथौरागढ़ पुलिस को सौंपी गई है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 19 June 2026, 9:37 AM IST
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Pithoragarh: देश की सुरक्षा में तैनात सेना के एक जवान द्वारा धोखाधड़ी और देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के बकलोह पुलिस थाने में सेना के एक जवान के खिलाफ फर्जी भर्ती का झांसा देकर ठगी करने, धोखाधड़ी और अपने आधिकारिक सैन्य पहचान पत्र का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोपों में 'जीरो एफआईआर' दर्ज की गई है।

चूंकि यह पूरा मामला उत्तराखंड के पिथौरागढ़ क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, इसलिए क्षेत्राधिकार के तहत मामले की आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए इस प्रकरण को पिथौरागढ़ कोतवाली स्थानांतरित कर दिया गया है।

यूनिट से छुट्टी लेकर भागा और घोषित हुआ 'भगोड़ा'

यह पूरा मामला मिलिट्री हॉस्पिटल बकलोह से जुड़ा हुआ है। अस्पताल के कार्यवाहक कमांडिंग ऑफिसर मेजर इंग्लिश सिंह दुशाली भूपिंदर ने 3 जून 2026 को बकलोह पुलिस थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, सेना का जवान एनके (एचके) बाबूलाल गोरे वर्ष 2025 में आकस्मिक अवकाश (कैजुअल लीव) पर गया था।

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छुट्टी समाप्त होने के बाद भी वह निर्धारित समय पर अपनी यूनिट में वापस नहीं लौटा। ड्यूटी से लगातार गायब रहने के कारण सेना द्वारा उसे 3 दिसंबर 2025 को आधिकारिक तौर पर 'भगोड़ा' घोषित कर दिया गया था। काफी लंबे समय के बाद, वह 1 जून 2026 को अचानक वापस अपनी यूनिट में पहुंचा।

रुपयों के लिए नागरिक को बेच दिया 'सैन्य पहचान पत्र'

यूनिट लौटने पर जब जवान बाबूलाल गोरे से प्रारंभिक पूछताछ और जांच की गई, तो देश की सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज सच सामने आया। जांच में पता चला कि भगोड़े जवान बाबूलाल गोरे ने कथित तौर पर अपना असली सैन्य पहचान पत्र (Military ID Card) पिथौरागढ़ के रहने वाले एक आम नागरिक अंकित कुमार आर्या को मोटी रकम के बदले बेच दिया था। सैन्य पहचान पत्र जैसी संवेदनशील चीज का इस तरह सौदा होने से सैन्य अधिकारी भी हैरान रह गए।

MES में नौकरी का झांसा देकर ऐंठे 90 हजार रुपये

घटनाक्रम के मुताबिक, 8 जनवरी 2026 को सेना की एक नियमित जांच के दौरान अंकित कुमार आर्या के पास से यह सैन्य पहचान पत्र बरामद हुआ था। जांच में आरोप लगा है कि बाबूलाल गोरे ने अंकित कुमार आर्या को मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (MES) में फर्जी तरीके से भर्ती कराने का झांसा दिया था।

नौकरी लगवाने के नाम पर उसने अंकित से 90 हजार रुपये की ठगी की। यह धनराशि अंकित के पिता प्रेम राम आर्या ने जून-जुलाई 2025 के दौरान अलग-अलग ऑनलाइन ट्रांजैक्शन माध्यमों से जवान के खाते में भेजी थी।

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बैंक खाते में मिले 2.12 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन

इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब जांच एजेंसियों ने बाबूलाल गोरे के बैंक खातों की पड़ताल की। बैंक स्टेटमेंट खंगालने पर पता चला कि जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के बीच जवान के खाते में उसके नियमित वेतन (सैलरी) के अतिरिक्त लगभग 2.12 करोड़ रुपये का भारी-भरकम संदिग्ध लेनदेन हुआ है। इतनी बड़ी रकम खाते में आने के बाद इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि आरोपी जवान कई अन्य लोगों को भी फर्जी भर्ती का शिकार बना चुका है।

सैन्य अधिकारियों ने इन वित्तीय गतिविधियों की गहन जांच की मांग की है। बकलोह पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में जीरो एफआईआर दर्ज करने के बाद पिथौरागढ़ के कोतवाल ललित मोहन जोशी ने बताया कि मामले की डायरी मिल चुकी है और सघन जांच शुरू कर दी गई है।

Location :  Pithoragarh

Published :  19 June 2026, 9:37 AM IST

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