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अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर नैनीताल में एक बार फिर जनआक्रोश सड़कों पर दिखा। कांग्रेस के आह्वान पर निकले कैंडल मार्च में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया और निष्पक्ष जांच व सीबीआई जांच की मांग दोहराई।
अंकिता भंडारी
Nainital: एक बेटी की चीख, जो पहाड़ों में गूंजकर भी आज तक इंसाफ नहीं पा सकी। अंकिता भंडारी हत्याकांड ने उत्तराखंड की आत्मा को झकझोर दिया था और अब एक बार फिर वही दर्द नैनीताल की सड़कों पर उतर आया। मोमबत्तियों की रोशनी, नम आंखें और गुस्से से भरे नारे। यह सिर्फ एक मार्च नहीं था, बल्कि उस सिस्टम से सवाल था, जो अब तक जवाब देने से बचता रहा है।
मल्लीताल से तल्लीताल तक न्याय की पुकार
मंगलवार की शाम मल्लीताल स्थित पंत पार्क में लोगों का जुटना शुरू हुआ। आम नागरिक, युवा, महिलाएं और कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंचे। यहां पहले हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, जिसमें लोगों ने खुलकर हिस्सा लिया और अंकिता के लिए न्याय की मांग दर्ज कराई। कुछ ही देर में यह भीड़ एक बड़े जनसैलाब में बदल गई।
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मोमबत्तियों की रोशनी में गुस्सा और दर्द
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ कैंडल मार्च मल्लीताल से मालरोड होते हुए तल्लीताल की ओर बढ़ा। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कुछ देर के लिए मालरोड की रफ्तार थम सी गई। मोमबत्तियों की रोशनी में लोगों के चेहरों पर दर्द साफ नजर आ रहा था। नारे लग रहे थे कि दोषियों को बचाने की कोशिश अब नहीं चलेगी और जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए।
सरकार की चुप्पी पर सवाल
जुलूस तल्लीताल गांधी चौक पहुंचा, जहां सभा आयोजित की गई। वक्ताओं ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि पहाड़ की बेटी की सुरक्षा, सम्मान और अस्मिता से जुड़ा सवाल है। लगातार सामने आ रहे नए वीडियो और तथ्यों के बावजूद सरकार की चुप्पी पर नाराजगी जताई गई। कहा गया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली सरकार खुद कटघरे में खड़ी है।
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सीबीआई जांच की दोहराई मांग
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मांग की कि इस पूरे मामले की निगरानी किसी स्वतंत्र न्यायाधीश के निर्देशन में कराई जाए और सीबीआई जांच से सच्चाई सामने लाई जाए। लोगों का कहना था कि जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह आवाज यूं ही सड़कों पर गूंजती रहेगी।