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अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर देहरादून में महापंचायत आयोजित की गई, जहां वीवीआईपी को सजा, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग उठी।
अंकिता हत्याकांड पर देहरादून में महापंचायत
Dehradun: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड ने एक बार फिर सियासी और सामाजिक माहौल को गरमा दिया है। इंसाफ की आस में बैठा प्रदेश इस बार देहरादून में जुटी महापंचायत का गवाह बना, जहां वीवीआईपी आरोपी को बेनकाब करने, सजा दिलाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी। इस महापंचायत का माहौल पूरी तरह गुस्से, दर्द और न्याय की पुकार से भरा रहा।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जुटे लोग
देहरादून में आयोजित इस महापंचायत का आयोजन ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले किया गया। इसमें बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि अंकिता भंडारी के माता-पिता सोनी देवी और वीरेंद्र सिंह भंडारी खुद मंच पर मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी ने पूरे कार्यक्रम को भावुक बना दिया और इंसाफ की मांग को और मजबूती दी।
महापंचायत में पारित हुए पांच अहम प्रस्ताव
महापंचायत के दौरान पांच प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें सबसे अहम मांग यह रही कि अंकिता के माता-पिता द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र को ही सीबीआई जांच का आधार माना जाए और सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच कराई जाए। वक्ताओं ने साफ कहा कि किसी तीसरे व्यक्ति की एफआईआर के आधार पर जांच कराना पीड़ित पक्ष के साथ अन्याय है। इसके साथ ही लक्ष्मण झूला थाने में दर्ज मूल एफआईआर के आधार पर ही वीआईपी और सबूत मिटाने वालों की जांच की मांग उठी।
रिज़ॉर्ट ध्वस्तीकरण और मुख्यमंत्री पर सवाल
महापंचायत में वनन्तरा रिज़ॉर्ट को रातों-रात बुलडोजर से गिराए जाने का मुद्दा भी जोरशोर से उठा। आरोप लगाया गया कि इससे अहम सबूत नष्ट हुए और इसकी अनुमति मुख्यमंत्री स्तर से दी गई थी। इसी आधार पर मांग की गई कि निष्पक्ष जांच पूरी होने तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से हट जाना चाहिए।
राजनीतिक नामों की जांच और आंदोलन की चेतावनी
महापंचायत में भाजपा से जुड़े दो पदाधिकारियों दुष्यंत कुमार गौतम और अजय कुमार को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई। साथ ही चेतावनी दी गई कि अगर 15 दिनों के भीतर पीड़ित पक्ष के प्रार्थना पत्र के आधार पर सीबीआई जांच आगे नहीं बढ़ी तो पूरे उत्तराखंड में शांतिपूर्ण जनांदोलन छेड़ा जाएगा।
सीबीआई जांच और वीआईपी एंगल पर हलचल
इस बीच सीबीआई ने आधिकारिक तौर पर अंकिता भंडारी मर्डर केस की जांच अपने हाथ में ले ली है। दिल्ली की स्पेशल क्राइम ब्रांच द्वारा एक वीआईपी के खिलाफ केस दर्ज किए जाने के बाद सीबीआई की टीम उत्तराखंड पहुंच चुकी है। मामला तब और सुर्खियों में आया जब भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर से जुड़े कथित ऑडियो और वीडियो वायरल हुए।