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नैनीताल हाईकोर्ट ने शीतकालीन अवकाश के दौरान न्यायिक कामकाज की व्यवस्था बदलते हुए बड़ा फैसला लिया है। नए आदेश के बाद अब अदालत सप्ताह के हर कार्य दिवस पर सुनवाई करेगी। यह व्यवस्था 13 जनवरी 2026 से लागू होगी, जबकि केस फाइलिंग 12 जनवरी से शुरू की जा सकेगी।
उत्तराखंड हाईकोर्ट
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शीतकालीन अवकाश के दौरान न्यायिक कार्यों की व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए वादियों और अधिवक्ताओं को बड़ी राहत दी है। अदालत ने नया आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि अब अवकाश अवधि में शनिवार, रविवार और घोषित सरकारी छुट्टियों को छोड़कर सप्ताह के सभी कार्य दिवसों पर न्यायिक कार्यवाही नियमित रूप से संचालित की जाएगी। यह नई व्यवस्था 13 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी, जबकि मामलों की फाइलिंग 12 जनवरी 2026 से शुरू कर दी जाएगी।
अब तक हाईकोर्ट में शीतकालीन अवकाश के दौरान सप्ताह में केवल दो दिन ही अदालतें खुलती थीं। शेष दिनों में न्यायिक कार्य पूरी तरह से स्थगित रहता था, जिससे जरूरी और तात्कालिक मामलों की सुनवाई में देरी होती थी। वादियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी।
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नए आदेश के तहत अदालत ने अवकाशकालीन व्यवस्था में संशोधन करते हुए यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ करने और आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उठाया है। हाईकोर्ट का मानना है कि अवकाश के दौरान भी आवश्यक न्यायिक कार्य बाधित नहीं होने चाहिए, ताकि लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाई जा सके।
जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि फाइलिंग सेक्शन का समय निर्धारित कर दिया गया है। अब अधिवक्ता और वादी सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक नए मामलों की फाइलिंग कर सकेंगे। खास बात यह है कि फाइल किए गए मामलों को अगले ही कार्य दिवस पर अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर दिया जाएगा, जिससे जरूरी मामलों में तुरंत सुनवाई संभव हो सकेगी।
हाईकोर्ट के महाधिवक्ता की ओर से यह आदेश बार एसोसिएशन और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों तक भेज दिया गया है। इसके साथ ही अदालत ने इस आदेश को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया है, ताकि अधिवक्ता और वादी नई व्यवस्था की पूरी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें।
मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिए हैं कि शीतकालीन अवकाश के बावजूद न्यायिक प्रक्रियाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके तहत लंबित मामलों के साथ-साथ तात्कालिक सुनवाई की आवश्यकता वाले प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा।
नई व्यवस्था से वादियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब अवकाश के कारण मामलों की सुनवाई रुकने की समस्या कम होगी और न्याय की प्रक्रिया अधिक प्रभावी एवं तेज़ हो सकेगी। इसे हाईकोर्ट की न्यायिक सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।