हिंदी
इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में ग्रेटर नोएडा पुलिस ने लोटस ग्रीन के बिल्डर निर्मल सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। दो लोग गिरफ्तार, SIT और NGT जांच में जुटे हैं।
ग्रेटर नोएडा पुलिस का बड़ा एक्शन
Greater Noida: इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में ग्रेटर नोएडा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लोटस ग्रीन बिल्डर निर्मल सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी बिल्डर फिलहाल फरार है, लेकिन उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस दर्दनाक हादसे के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा पुलिस की पहले ही काफी आलोचना हो चुकी है। इसी वजह से अब पुलिस पूरी गंभीरता के साथ मामले में कार्रवाई कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को कानून के शिकंजे से बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा।
गुरुवार को ग्रेटर नोएडा पुलिस ने लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े दो लोगों रवि बंसल और सचिन करणवाल को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही पुलिस ने बिल्डर के दो ऑफिस भी सील कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।
नोएडा इंजीनियर युवराज मामले में नया मोड़, चार दिन बाद बरामद हुई कार, जानिये SIT की आगे की प्रक्रिया
जांच में सामने आया है कि जिस गड्ढे में युवराज मेहता की कार गिरी थी, वह बेहद गहरा था और उसमें प्रदूषित पानी भरा हुआ था। सबसे गंभीर बात यह रही कि गड्ढे के आसपास कोई बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह गड्ढा लंबे समय से परेशानी का कारण बना हुआ था।
इस मामले में पहले ही पांच अन्य व्यक्तियों अभय कुमार, संजय कुमार, मनीष कुमार, अचल बोहरा और निर्मल कुमार के खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है। इन पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि जिस जमीन पर यह गड्ढा मौजूद था, उसे लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन ने वर्ष 2014 में खरीदा था और बाद में 2020 में विजटाउन को बेच दिया गया। हालांकि, लोटस ग्रीन कंपनी की इस जमीन में अब भी हिस्सेदारी बनी हुई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। सीएम योगी ने SIT को पांच दिन के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। इसके बाद NDRF की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया है। NGT ने पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।
नोएडा में इंजीनियर की मौत: जिसने युवराज की जान बचाने की कोशिश की, उसको थाने में 5 घंटे बैठाया
नोएडा प्राधिकरण ने SIT को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें परियोजना से जुड़ी अनुमतियां, बुनियादी सुविधाओं की स्थिति, सुरक्षा इंतजाम और हादसे से पहले व बाद की प्रशासनिक कार्रवाई का पूरा विवरण शामिल है। साथ ही आपदा प्रबंधन और विभागों के बीच समन्वय की भी जांच की गई है।