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पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल NEET छात्रा दुष्कर्म मामले की जांच अधूरे दस्तावेजों के कारण प्रभावित हो रही है। AIIMS पटना की विशेषज्ञ टीम तैयार है, लेकिन SIT द्वारा सभी जरूरी रिकॉर्ड न मिलने से निष्कर्ष में देरी हो रही है।
शंभू गर्ल्स हॉस्टल NEET छात्रा दुष्कर्म मामला
Patna: बिहार की राजधानी पटना स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा से दुष्कर्म के मामले में जांच अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल केस में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा उपलब्ध कराए गए अधूरे दस्तावेज जांच प्रक्रिया में बड़ी बाधा बनते नजर आ रहे हैं। इससे न सिर्फ फॉरेंसिक जांच प्रभावित हो रही है, बल्कि न्याय की दिशा में बढ़ते कदम भी धीमे पड़ते दिख रहे हैं।
मामले की गहराई से जांच के लिए SIT ने पटना एम्स को पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत कुछ अहम दस्तावेज सौंपे थे, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। एम्स प्रशासन के अनुसार, निदेशक और अधीक्षक के निर्देश पर तुरंत जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। इसके लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम भी गठित की गई है।
एम्स पटना के फॉरेंसिक विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए कुल पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बनाई गई है। टीम का नेतृत्व स्वयं डॉ. विनय कुमार कर रहे हैं। इसमें फॉरेंसिक मेडिसिन के दो विशेषज्ञों के अलावा गायनाकोलॉजी, न्यूरोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग के एक-एक वरिष्ठ डॉक्टर शामिल हैं।
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डॉ. विनय कुमार के अनुसार, जांच पूरी तरह से वैज्ञानिक और निष्पक्ष तरीके से की जा रही है, लेकिन SIT की ओर से सभी जरूरी दस्तावेज एक साथ उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण जांच की रफ्तार प्रभावित हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेडिकल और फॉरेंसिक जांच पूरी तरह रिकॉर्ड और दस्तावेजों पर निर्भर होती है। यदि आवश्यक कागजात समय पर नहीं मिलते, तो समीक्षा प्रक्रिया में देरी होना स्वाभाविक है।
एम्स सूत्रों के मुताबिक, विशेषज्ञों की यह टीम पिछले एक सप्ताह से लगातार दस्तावेजों की समीक्षा और तकनीकी विश्लेषण में जुटी हुई है। हालांकि, SIT द्वारा दस्तावेज चरणबद्ध तरीके से सौंपे जा रहे हैं, जिससे जांच को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने में और समय लग सकता है।
पटना एम्स (Img- Internet)
फॉरेंसिक विभागाध्यक्ष ने यह भी कहा कि जांच को और अधिक मजबूत और निष्पक्ष बनाने के लिए यदि आवश्यकता पड़ी, तो अन्य विशेषज्ञों को भी टीम में शामिल किया जा सकता है। उनका कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तकनीकी पहलुओं की गहन जांच जरूरी है।
यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली की भी परीक्षा बन चुका है। NEET छात्रा दुष्कर्म केस को लेकर पूरे बिहार में आक्रोश है और लोग तेजी से निष्पक्ष जांच और दोषियों को सख्त सजा की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल, एम्स की विशेषज्ञ टीम पूरी तरह जांच के लिए तैयार है, लेकिन जब तक SIT सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराती, तब तक किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना संभव नहीं है। ऐसे में अब सवाल यह उठ रहा है कि SIT कब तक सभी रिकॉर्ड सौंपकर जांच को निर्णायक दिशा दे पाएगी।
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NEET छात्रा दुष्कर्म मामला अब केवल एक केस नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता की कसौटी बन चुका है। समय पर, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच ही पीड़िता को न्याय दिला सकती है। अब सबकी निगाहें SIT की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।