कौन थी ‘मोगली गर्ल’? 9 साल पहले बंदरों के बीच मिली बच्ची ने अब दुनिया को कहा अलविदा, कहानी जानकर भर आएंगी आंखें

9 साल पहले जंगल में बंदरों के झुंड के बीच मिली एक रहस्यमयी बच्ची ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। लोग उसे ‘मोगली गर्ल’ और ‘वन दुर्गा’ के नाम से जानते थे। अब उसके निधन की खबर ने कई लोगों को भावुक कर दिया है। आखिर कौन थी यह बच्ची।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 20 June 2026, 3:11 PM IST
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Bahraich: एक समय था जब उत्तर प्रदेश के बहराइच के जंगलों से आई एक तस्वीर ने पूरे देश को हैरान कर दिया था। घने जंगल में बंदरों के झुंड के बीच मिली एक मासूम बच्ची अचानक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई थी। लोग उसे ‘मोगली गर्ल’ कहने लगे थे। किसी को उसका नाम नहीं पता था, न परिवार का पता और न ही उसके अतीत की कोई जानकारी। अब वही बच्ची, जिसने नौ साल तक जिंदगी से लंबी लड़ाई लड़ी, इस दुनिया को अलविदा कह गई है।

उसकी मौत की खबर सामने आने के बाद उन लोगों की आंखें भी नम हो गईं, जिन्होंने उसे बचपन से संभाला, इलाज कराया और एक नई जिंदगी देने की कोशिश की।

कौन थी मोगली गर्ल?

यह कहानी जनवरी 2017 से शुरू होती है। बहराइच के कतरनियाघाट वन्य जीव अभयारण्य के घने जंगलों में लोगों ने एक ऐसी बच्ची को देखा जो बंदरों के झुंड के साथ घूम रही थी। शुरुआत में किसी को यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तो उन्होंने एक करीब 10 साल की बच्ची को बंदरों के बीच पाया।

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि बच्ची इंसानों को देखकर डर जाती थी। वह सामान्य बच्चों की तरह बात नहीं करती थी और चारों हाथ-पैरों के सहारे चलती थी। कपड़े पहनने में भी उसे असहजता महसूस होती थी। यही वजह थी कि लोगों ने उसे ‘मोगली गर्ल’ नाम देना शुरू कर दिया। स्थानीय लोग उसे प्यार से ‘वन दुर्गा’ भी बुलाने लगे।

देशभर में बनी थी चर्चा का विषय

जंगल से मिलने के बाद बच्ची को पहले बहराइच जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां उसका इलाज शुरू हुआ। उसके व्यवहार और जीवनशैली को देखकर डॉक्टर भी हैरान थे। धीरे-धीरे उसकी खबर देशभर में फैल गई। मीडिया रिपोर्ट्स और तस्वीरों के जरिए लोग इस बच्ची के बारे में जानने लगे। हर कोई यह जानना चाहता था कि आखिर वह जंगल में कैसे पहुंची और उसका परिवार कौन है। हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद उसके परिजनों का कोई पता नहीं चल सका।

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मोगली गर्ल से बनी 'एहसास'

बहराइच की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने बच्ची को नया जीवन देने की कोशिश शुरू की। शुरुआत में उसका नाम पूजा रखा गया। बाद में जब उसे लखनऊ के मोहन रोड स्थित विशेष बाल गृह में भेजा गया तो उसका नाम बदलकर 'एहसास' कर दिया गया। वहां उसे सामान्य जीवन सिखाने की कोशिश की गई। उसे बोलना, कपड़े पहनना, लोगों से मिलना-जुलना और रोजमर्रा की गतिविधियां सिखाई गईं। उसकी देखभाल करने वाली कर्मियों रेनू और माया ने उसे बेटी की तरह संभाला। दोनों हर समय उसके साथ रहती थीं और उसकी जरूरतों का ध्यान रखती थीं।

जब डीएम ने दिया था नया नाम

उस समय के बहराइच जिलाधिकारी अजय दीप सिंह भी बच्ची से मिलने अस्पताल पहुंचे थे। नवरात्र का समय होने के कारण उन्होंने बच्ची का नाम 'वन दुर्गा' रखा। इसके बाद तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री रीता बहुगुणा जोशी के निर्देश पर उसे बेहतर इलाज और देखभाल के लिए लखनऊ भेजा गया। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार चलता रहा।

धीरे-धीरे बदल रही थी जिंदगी

समय के साथ बच्ची की हालत में सुधार आने लगा। हालांकि वह पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी, लेकिन उसने कई नई चीजें सीखीं। जो बच्ची कभी इंसानों से डरती थी, वह धीरे-धीरे लोगों को पहचानने लगी थी। उसकी कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई थी। लोग उसे देखने आते थे और उसके संघर्ष की चर्चा करते थे।

अचानक बिगड़ी तबीयत

करीब नौ साल तक देखभाल और इलाज के बाद अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई। उसे लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी के कारण 15 जून को उसकी मौत हो गई। उसके निधन की खबर मिलते ही उसे करीब से जानने वाले लोग भावुक हो गए। खासकर रेनू और माया, जिन्होंने वर्षों तक उसकी देखभाल की थी, खुद को संभाल नहीं सकीं।

मोगली गर्ल की जिंदगी रहस्यों से भरी रही। वह कहां से आई, उसके माता-पिता कौन थे और वह जंगल तक कैसे पहुंची, इन सवालों के जवाब शायद कभी नहीं मिल पाएंगे।

Location :  Bahraich

Published :  20 June 2026, 3:11 PM IST

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