हिंदी
सोनभद्र के चुर्क स्थित स्वामी हरसेवानंद पब्लिक स्कूल में सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के दौरान छात्रों से कलावा, ताबीज और माला उतरवाने का मामला तूल पकड़ गया। अभिभावकों और एबीवीपी ने इसे मनमानी बताते हुए विरोध दर्ज कराया और जांच की मांग की है।
परीक्षा केंद्र में छात्राओं की खुले में चेकिंग से हंगामा
Sonbhadra: सोनभद्र जिले के चुर्क स्थित स्वामी हरसेवानंद पब्लिक स्कूल में सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के दौरान स्कूल प्रबंधन के कथित तुगलकी रवैये को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि परीक्षा केंद्र पर छात्र-छात्राओं से कलावा, ताबीज और गले की साधारण माला उतरवाई गई, जिससे अभिभावकों और छात्रों में नाराजगी फैल गई। मामला सामने आते ही क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया और अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।
अभिभावकों का कहना है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से ऐसी कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की गई है, जिसमें छात्रों को कलावा, ताबीज या साधारण धार्मिक धागे पहनकर परीक्षा देने से रोका गया हो। उनका कहना है कि सीबीएसई के एडमिट कार्ड पर भी इस संबंध में कोई निर्देश अंकित नहीं है।
Sonbhadra News: जेल से परीक्षा हॉल तक… पुलिस अभिरक्षा में लिखी उत्तर पुस्तिका, पढ़ें ये अनोखी खबर
अभिभावकों ने सवाल उठाया कि जब परीक्षा केंद्र पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में परीक्षा कराई जा रही है, तो फिर साधारण धागे या ताबीज से नकल की संभावना कैसे हो सकती है? उनका आरोप है कि इस तरह की सख्ती से बच्चों पर मानसिक दबाव बना, जिससे उनकी परीक्षा प्रभावित हो सकती है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब कुछ छात्राओं की खुले में चेकिंग किए जाने की बात सामने आई। इस पर अभिभावक और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ता भड़क उठे। उनका कहना है कि छात्राओं की गरिमा और गोपनीयता का ध्यान रखा जाना चाहिए था।
अभिभावकों ने इसे अनुचित और अपमानजनक बताते हुए कहा कि परीक्षा जैसे संवेदनशील माहौल में इस तरह की कार्रवाई से बच्चों का आत्मविश्वास प्रभावित होता है।
सीबीएसई गाइडलाइन पर उठे सवाल
एबीवीपी के पदाधिकारियों ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि सीबीएसई की गाइडलाइन में कलावा या साधारण माला पहनने पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है, तो स्कूल प्रबंधन द्वारा इस प्रकार की कार्रवाई उचित नहीं है।
एबीवीपी पदाधिकारी मृगांग दुबे ने कहा, "सीबीएसई की गाइडलाइन में कलावा या साधारण माला पहनने पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है। बिना लिखित निर्देश के इस तरह का कदम छात्रों पर अनावश्यक दबाव बनाता है।"
उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले को जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) के संज्ञान में लाया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की मांग की जाएगी।
अभिभावकों का आरोप है कि परीक्षा के दौरान इस प्रकार की सख्ती से छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव बनता है। बोर्ड परीक्षा पहले से ही छात्रों के लिए तनावपूर्ण होती है, ऐसे में अचानक धार्मिक प्रतीकों या निजी वस्तुओं को उतरवाने से उनका ध्यान भटक सकता है और प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।
Sonbhadra News: 10 ट्रेड यूनियनों का प्रदर्शन, श्रम संहिता रद्द करने और निजीकरण रोकने की मांग
मामले को लेकर अभिभावकों और एबीवीपी ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि स्कूल प्रबंधन ने बिना आधिकारिक निर्देश के ऐसा कदम उठाया है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में छात्रों को इस प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और सभी की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।