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फतेहपुर जिले की असोथर मंडी समिति में धान खरीद व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में है। योगी सरकार में किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने के दावों के बीच यहां मंडी माफिया और दलालों का दबदबा साफ दिखाई दे रहा है।
Fatehpur: फतेहपुर जिले की असोथर मंडी समिति में धान खरीद व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में है। योगी सरकार में किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने के दावों के बीच यहां मंडी माफिया और दलालों का दबदबा साफ दिखाई दे रहा है। किसानों का आरोप है कि अधिकारियों के आशीर्वाद से माफिया मंडी व्यवस्था को अपने हिसाब से चला रहे हैं, जिससे किसान औने-पौने दामों पर धान बेचने को मजबूर हो रहे हैं।
किसानों का कहना है कि मंडी में धान तौल से पहले ही माफियाओं की पन्नी और तिरपाल डाल दी जाती है। तौल के अंत तक किसानों का नहीं, बल्कि माफियाओं का धान तौला जाता है। सरकार की मंशा है कि किसानों की उपज की प्राथमिकता से तौल हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। किसान महीनों से तौल के लिए चक्कर काट रहे हैं, जबकि दलाल सेटिंग के जरिए पहले ही अपना काम निपटा लेते हैं।
किसानों ने आरोप लगाया कि धान की तौल में प्रति कुंतल 7 से 8 किलो तक की कटौती की जाती है। तौल में देरी और कटौती से परेशान किसान मजबूरी में अपनी फसल 2300 रुपये प्रति कुंतल के बजाय 1700 से 1800 रुपये में दलालों को बेच देते हैं, ताकि मंडी और अधिकारियों के सामने बार-बार हाथ न फैलाना पड़े।