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गोला थाना क्षेत्र के ग्राम जिगिनी बुजुर्ग में दलित उत्पीड़न, तोड़फोड़, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी का गंभीर मामला सामने आया है। न्यायालय के आदेश पर गोला थाने में कई नामजद आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पढिए पुरी खबर
उत्पीड़न का मुकदमा
गोरखपुर : गोला थाना क्षेत्र के ग्राम जिगिनी बुजुर्ग में दलित उत्पीड़न, तोड़फोड़, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी का गंभीर मामला सामने आया है। न्यायालय के आदेश पर गोला थाने में कई नामजद आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पीड़ित परिवार को न्याय पाने के लिए दो वर्षों तक संघर्ष करने की कहानी भी बयां करती है।
क्या है पूरी खबर?
पीड़िता कुसुम देवी के अनुसार, 17 जून 2023 की सुबह करीब 6 बजे गांव के ही राजेश व चक्रधारी पुत्रगण रघुवंश पांडेय, गोविंद पुत्र जग्गेश, अनिरुद्ध पुत्र मार्कण्डेय, अशोक पांडेय पुत्र हरखचंद तथा कुछ अज्ञात लोग उनके घर पहुंचे। आरोप है कि सभी ने जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी और जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता का कहना है कि हमलावरों का दुस्साहस इतना बढ़ा हुआ था कि पुलिस के पहुंचने के बावजूद उन्होंने उत्पात मचाना बंद नहीं किया।
पीड़िता ने उच्चाधिकारियों से भी शिकायत
घटना की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता ने तत्काल डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को बुलाया। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोप है कि पुलिस के सामने ही आरोपियों ने पीड़िता के घर का नाद-खूंटा तोड़ दिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस द्वारा केवल आश्वासन दिया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद पीड़िता ने उच्चाधिकारियों से भी शिकायत की, किंतु वहां से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
पीड़ित परिवार को न्यायालय की शरण
पीड़िता ने बताया कि यह पूरी घटना उनके पति द्वारा आरोपियों के यहां बेगारी करने से इनकार करने के कारण अंजाम दी गई। सामाजिक दबदबे और जातिगत द्वेष के चलते पीड़ित परिवार को लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा। अंततः थक-हार कर पीड़ित परिवार को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, जहां से आदेश मिलने के बाद अब जाकर मामला दर्ज हो सका।
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इस संबंध में गोला थाना प्रभारी राहुल शुक्ला ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 147 (दंगा), 504 (जानबूझकर अपमान), 506 (आपराधिक धमकी), 427 (नुकसान पहुंचाना) तथा एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1)द, 3(1)घ और 3(2)(va) के तहत अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर क्यों पीड़ितों को न्याय पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, और क्यों प्रारंभिक स्तर पर ही प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती।