विवेक तिवारी हत्याकांड में 8 साल बाद आया फैसला, पुलिस के लिए काम करने वाले चौधरी को 10 साल की जेल, जानें क्यों किया था मर्डर?

लखनऊ के चर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 10 साल की जेल और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं सह-आरोपी सिपाही संदीप कुमार को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है...

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 21 September 2026, 4:36 PM IST
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Lucknow News: लखनऊ के बहुचर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में करीब 8 साल लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं मामले में सह-आरोपी रहे दूसरे सिपाही संदीप कुमार को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।

कोर्ट ने 304 पार्ट-2 के तहत माना दोषी

लखनऊ जिला एवं सत्र न्यायालय ने प्रशांत चौधरी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 पार्ट-2 के तहत दोषी माना है। यह धारा ऐसे मामलों में लगाई जाती है, जहां किसी व्यक्ति की मौत आरोपी के कृत्य से होती है, लेकिन हत्या का सीधा इरादा साबित नहीं होता। अदालत के फैसले के बाद अब इस मामले में दोषी पाए गए प्रशांत चौधरी को जेल की सजा काटनी होगी। हालांकि, मृतक विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने कोर्ट के फैसले पर असंतोष जताया है।

पत्नी कल्पना तिवारी बोलीं- फैसले के खिलाफ जाएंगे हाईकोर्ट

विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने कहा कि वह अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि एक प्रशिक्षित पुलिसकर्मी द्वारा चलाई गई गोली को सिर्फ गलती या गैर-इरादतन घटना नहीं माना जा सकता। कल्पना तिवारी ने संकेत दिया है कि वह इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी। उनका कहना है कि उन्हें न्याय के लिए आगे की कानूनी लड़ाई जारी रखनी होगी।

28 सितंबर 2018 की रात हुई थी घटना

यह पूरा मामला 28 सितंबर 2018 की रात लखनऊ के गोमती नगर विस्तार इलाके का है। उस समय एप्पल कंपनी में एरिया सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत विवेक तिवारी अपनी महिला सहकर्मी के साथ कार से घर लौट रहे थे। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने चेकिंग के लिए कार रोकने की कोशिश की। आरोप था कि कार नहीं रुकने पर सिपाही प्रशांत चौधरी ने गोली चला दी, जो विवेक तिवारी को लगी। गोली लगने के बाद उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था। पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और कार्रवाई को लेकर भी कई सवाल उठे थे।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया फैसला

विवेक तिवारी हत्याकांड में जांच और सुनवाई की प्रक्रिया करीब आठ साल तक चली। अब अदालत के फैसले के बाद मामले में एक अहम पड़ाव आया है। जहां एक आरोपी को दोषी ठहराया गया है, वहीं दूसरे आरोपी को सबूतों के अभाव में राहत मिली है।

Location :  Lucknow News

Published :  21 September 2026, 4:36 PM IST

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