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कानपुर देहात से जुड़ी सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। उत्तर भारत के पेरियार के रूप में प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पेरियार ललई सिंह यादव के प्रपौत्र ललई बृजेंद्र सिंह यादव ने सामाजिक न्याय की राजनीति को आगे बढ़ाते हुए इस पार्टी का दामन थाम लिया हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने ललई बृजेंद्र सिंह यादव से की मुलाकात
Kanpur Dehat: जनपद कानपुर देहात से जुड़ी सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। उत्तर भारत के पेरियार के रूप में प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पेरियार ललई सिंह यादव के प्रपौत्र ललई बृजेंद्र सिंह यादव ने सामाजिक न्याय की राजनीति को आगे बढ़ाते हुए आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ग्रहण कर ली है।
दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच सामाजिक बदलाव, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
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सदस्यता ग्रहण करने के बाद ललई बृजेंद्र सिंह यादव बोले...
सदस्यता ग्रहण करने के बाद ललई बृजेंद्र सिंह यादव ने कहा कि वे अपने परबाबा पेरियार ललई सिंह यादव के आदर्शों-समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की विचारधारा इन मूल्यों के बेहद करीब है, इसलिए उन्होंने इस मंच को चुना है।
वहीं, चंद्रशेखर आजाद ने उनका पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि इस जुड़ाव से संगठन को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि ललई बृजेंद्र सिंह यादव के आने से सामाजिक न्याय की लड़ाई को नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी। गौरतलब है कि ललई बृजेंद्र सिंह यादव, पेरियार ललई सिंह यादव चैरिटेबल ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं और सामाजिक सरोकारों से लंबे समय से जुड़े रहे हैं।
उन्होंने वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने आगे कहा कि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की विचारधारा इन मूल्यों के करीब है, जो उनके परबाबा के सिद्धांतों के अनुरूप है। चंद्रशेखर आजाद ने बृजेंद्र सिंह यादव का पार्टी में स्वागत किया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस जुड़ाव से पार्टी को और मजबूती मिलेगी, साथ ही सामाजिक न्याय की लड़ाई को एक नई दिशा प्राप्त होगी। बृजेंद्र सिंह यादव बहुजन लेखक होने के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पेरियार ललई सिंह यादव के प्रपौत्र भी हैं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल एक वैचारिक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि उत्तर प्रदेश की बहुजन राजनीति में भी एक नया समीकरण स्थापित कर सकता है।