27 साल तक वर्दी पहनकर करता रहा नौकरी, फिर खुला ऐसा राज कि कोर्ट ने सुना दी 3 साल की सजा

फर्जी शपथपत्र के आधार पर पीएसी में नौकरी पाने वाले भोजराज सिंह को 27 साल पुराने मामले में आगरा की अदालत ने दोषी ठहराते हुए तीन साल की जेल और तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। विभागीय जांच में वह पहले ही सेवा से बर्खास्त किया जा चुका था।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 9 July 2026, 9:51 AM IST
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Agra: उत्तर प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने के एक 27 साल पुराने मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। फर्जी शपथपत्र के आधार पर प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) में सिपाही की नौकरी पाने वाले भोजराज सिंह को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए तीन साल के साधारण कारावास और तीन हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। विभागीय जांच में फर्जीवाड़ा साबित होने के बाद आरोपी को पहले ही सेवा से बर्खास्त किया जा चुका था।

फर्जी शपथपत्र के सहारे हासिल की सरकारी नौकरी

जानकारी के मुताबिक, हाथरस जिले के सादाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम सिथरापुर निवासी भोजराज सिंह ने फर्जी शपथपत्र प्रस्तुत कर पीएसी में सिपाही के पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी। लंबे समय तक वह विभाग में कार्य करता रहा, लेकिन दस्तावेजों की जांच के दौरान उसके शपथपत्र में गड़बड़ी सामने आ गई। इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई।

1998 में दर्ज हुआ था मुकदमा

मामले का खुलासा होने पर एआरआईएम कार्यालय के तत्कालीन कार्यवाहक प्रधान लिपिक प्रदीप कुमार वर्मा ने 8 सितंबर 1998 को आगरा के ताजगंज थाने में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी ने गलत दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की।

पुलिस ने जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य जुटाए और 1 जनवरी 1999 को भोजराज सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद विभागीय जांच भी कराई गई, जिसमें फर्जीवाड़ा सही पाया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को पीएसी की सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

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27 साल बाद आया अदालत का फैसला

पुलिस ने विवेचना पूरी कर 31 मई 1999 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए गए।

विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानंद गुप्ता की अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर भोजराज सिंह को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे तीन साल के साधारण कारावास और तीन हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

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फर्जी दस्तावेजों पर सख्त संदेश

अदालत के इस फैसले को सरकारी नौकरियों में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल करने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। यह मामला दर्शाता है कि चाहे अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, यदि साक्ष्य मौजूद हों तो कानून अपना काम करता है और दोषियों को सजा मिलती है।

Location :  Agra

Published :  9 July 2026, 9:51 AM IST

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