लिएंडर पेस के बाद अर्नव पापरकर ने विंबलडन के जूनियर एकल के अंतिम आठ में स्थान वनाकर रचा इतिहास

18 वर्षीय अर्नव पापरकर ने विंबलडन जूनियर्स के क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर 36 साल बाद भारत के लिए नया इतिहास रच दिया। लिएंडर पेस के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह पहले भारतीय हैं। उनकी दमदार सर्विस, रणनीतिक खेल और संघर्षपूर्ण सफर ने उन्हें भारतीय टेनिस का नया सितारा बना दिया है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 9 July 2026, 11:53 AM IST
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New Delhi: भारतीय टेनिस को एक नया उभरता सितारा मिल गया है। 18 वर्षीय अर्नव पापरकर ने विंबलडन जूनियर्स बॉयज़ सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर 36 साल पुराना भारतीय इंतजार खत्म कर दिया है। 1990 में लिएंडर पेस के बाद वह इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उनके शानदार प्रदर्शन ने न केवल भारतीय टेनिस प्रेमियों को उत्साहित किया है, बल्कि भविष्य के लिए नई उम्मीद भी जगा दी है।

विंबलडन में शानदार प्रदर्शन से रचा इतिहास

अर्नव पापरकर ने प्री-क्वार्टर फाइनल में जापान के रियो तबाता को 6-2, 6-1 से हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई। इससे पहले उन्होंने दूसरे दौर में अमेरिका के जूनियर विश्व नंबर-3 कीटन हैंस को 6-2, 6-3 से हराकर बड़ा उलटफेर किया था। आईटीएफ जूनियर विश्व रैंकिंग में 19वें स्थान पर मौजूद अर्नव का यह अब तक का सबसे यादगार प्रदर्शन माना जा रहा है।

दमदार सर्विस बनी सबसे बड़ी ताकत

करीब छह फीट लंबे अर्नव की सबसे बड़ी ताकत उनकी पहली सर्विस मानी जाती है। कीटन हैंस के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने छह ऐस लगाए और पूरे मैच में एक भी ब्रेक प्वाइंट नहीं गंवाया। उनकी सटीक सर्विस और आक्रामक खेल शैली ने उन्हें विरोधियों पर लगातार बढ़त दिलाई।

पुणे से शुरू हुआ सफर, स्पेन में मिली नई पहचान

अर्नव ने पुणे स्थित हेमंत बेंद्रे टेनिस अकादमी में कोच प्रसोनजीत पॉल के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया। बेहतर प्रदर्शन के लिए उन्होंने स्पेन में भी ट्रेनिंग की। उन्हें महाराष्ट्र स्टेट लॉन टेनिस एसोसिएशन (MSLTA), महाटेनिस फाउंडेशन, महाराष्ट्र सरकार की 'मिशन लक्ष्यवेध' योजना और कॉरपोरेट स्पॉन्सर आर्यन पंप्स का सहयोग मिला।

हर खेल से था लगाव, टेनिस ने बदल दी जिंदगी

अर्नव ने एक इंटरव्यू में बताया कि बचपन में उन्हें क्रिकेट, फुटबॉल, टेबल टेनिस और तैराकी समेत हर खेल पसंद था। तैराकी के दौरान उन्होंने पहली बार टेनिस कोर्ट देखा। वहीं एक कोच ने उन्हें टेनिस खेलने के लिए प्रेरित किया और छह साल की उम्र में उन्होंने रैकेट थाम लिया। माता-पिता ने भी हर कदम पर उनका पूरा साथ दिया।

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अब तक का शानदार करियर

अर्नव ने 2023 में ऑस्ट्रेलियन ओपन अंडर-14 एशिया-पैसिफिक एलीट ट्रॉफी से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। इसके बाद राष्ट्रीय अंडर-16 चैंपियनशिप जीती। 2025 में बहरीन और मलेशिया में आईटीएफ जूनियर खिताब अपने नाम किए। जनवरी 2026 में वह AITA अंडर-18 के नंबर-1 खिलाड़ी बने और लगातार 21 सप्ताह तक शीर्ष स्थान पर रहे।

अब भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें इस युवा खिलाड़ी पर टिकी हैं कि क्या वह विंबलडन जूनियर्स में भारत के लिए नया इतिहास रच पाएंगे।

Location :  New Delhi

Published :  9 July 2026, 11:53 AM IST

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