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ओटीटी से अचानक गायब हुई फिल्म सतलुज (Img- X)
Mumbai: मशहूर अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'सतलुज' इन दिनों सिनेमा जगत और सोशल मीडिया पर विवादों का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है। सेंसर बोर्ड के साथ लंबे समय तक चले विवाद के बाद आखिरकार इस फिल्म को 2 जुलाई 2026 को ओटीटी प्लेटफॉर्म 'जी5' (Zee5) पर रिलीज किया गया था। लेकिन, हैरानी की बात यह रही कि रिलीज के महज तीन दिन बाद ही इसे अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।
फिल्म को हटाए जाने के बाद से ही इसे लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। इसी बीच एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि 'सतलुज' और 'पंजाब 95' से पहले भी मेकर्स ने इस फिल्म का एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक नाम तय किया था, जिसे सुनते ही सेंसर बोर्ड भड़क गया था।
फिल्म की रिलीज के लिए मेकर्स को सालों तक कोर्ट और सेंसर बोर्ड के चक्कर काटने पड़े। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'सतलुज' इस फिल्म का अंतिम और तीसरा नाम है। जब मेकर्स ने साल 2022 में इस फिल्म का निर्माण शुरू किया था, तब इसका नाम 'घल्लुघारा' तय किया गया था। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास यह फिल्म इसी नाम से भेजी गई थी।
हालांकि, सीबीएफसी के अधिकारियों के मुताबिक यह नाम बेहद विवादास्पद, संवेदनशील और सामाजिक शांति को प्रभावित करने वाला था। बोर्ड के भारी विरोध के बाद मेकर्स ने इसका नाम बदलकर 'पंजाब 95' किया। मगर, जब इस नाम पर भी कैंची चलाई गई, तब जाकर इसे 'सतलुज' नाम से रिलीज का रास्ता मिल सका।
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आखिर इस नाम में ऐसा क्या था जिससे सेंसर बोर्ड डर गया? दरअसल, सिख इतिहास और धर्म में 'घल्लुघारा' शब्द का अर्थ बहुत बड़ा और दर्दनाक है। इसका सीधा मतलब 'नरसंहार' या 'सामूहिक कत्लेआम' होता है। सिख इतिहास में साल 1746, 1762 और फिर 1984 के काले दौर में हुए भीषण नरसंहारों को याद करने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।
चूंकि फिल्म में 1984 से लेकर 1995 तक पंजाब में हुए अशांत दौर और अनगिनत बेगुनाह मौतों के वीभत्स दृश्यों को दर्शाया गया है, इसलिए मेकर्स ने इस शब्द को शीर्षक के रूप में चुना था। लेकिन सीबीएफसी को लगा कि इस टाइटल से पुराने जख्म फिर हरे हो सकते हैं और देश का माहौल बिगड़ सकता है।
यह फिल्म पंजाब के मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के वास्तविक जीवन और उनके संघर्षों पर आधारित एक बायोपिक है। कहानी 1990 के दशक के उस काले और अशांत दौर की है, जब पंजाब के अंदर चरमपंथ और पुलिसिया कार्रवाई के बीच हजारों बेगुनाह युवाओं को गायब कर मार दिया जा रहा था।
उन मृत लोगों के परिजनों को न तो उनकी मौत की खबर मिलती थी और न ही अंतिम संस्कार के लिए शव। जसवंत सिंह खालरा ने इन लावारिस शवों का पूरा सच दुनिया के सामने लाया था। फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने खालरा का मुख्य किरदार निभाया है, जबकि उनके साथ अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान जैसे मंझे हुए कलाकार नजर आए हैं।
Location : Mumbai
Published : 8 July 2026, 1:26 PM IST