राम मंदिर दान में महा-घपला: चंपत राय के वायरल पत्र ने खोली अनिल मिश्रा और बैंक की पोल, जानें क्या लिखा था खत में

राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा पर शिकंजा कस गया है। पूर्व महासचिव चंपत राय का एसआईटी को लिखा पत्र वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर बिना मंजूरी गुप्त समझौते करने और नकदी प्रबंधन में कुप्रबंधन का गंभीर आरोप लगाया है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 9 July 2026, 10:39 AM IST
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Ayodhya: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन को लेकर एक नया और बेहद गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा पर अब कानूनी और प्रशासनिक शिकंजा कसता जा रहा है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष और ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का एसआईटी (SIT) को लिखा एक पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस पत्र के सामने आने के बाद से न सिर्फ राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बल्कि पूरे देश के धार्मिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

चंपत राय ने पत्र में क्या किए दावे?

बीते 7 जुलाई को वायरल हुए इस आधिकारिक पत्र में चंपत राय ने सीधे तौर पर अनिल मिश्रा को राम मंदिर के वित्तीय और प्रशासनिक कुप्रबंधन के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। यह पत्र उस समय का है जब चंपत राय स्वयं ट्रस्ट के महासचिव पद पर कार्यरत थे और इस पर उनके हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। राय ने पत्र में खुलासा किया है कि फरवरी 2025 में एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की गई थी।

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हैरान करने वाली बात यह है कि अनिल मिश्रा और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से इसे चंपत राय की जानकारी या उनकी लिखित अनुमति के बिना ही लागू कर दिया था। चंपत राय के मुताबिक, चूंकि एसबीआई से जुड़े सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार अनिल मिश्रा के पास थे, इसलिए इस लापरवाही की पूरी जवाबदेही भी उन्हीं की बनती है।

एसबीआई की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

पूर्व महासचिव चंपत राय ने देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की कार्यशैली को भी कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि कैश रजिस्टर में नोटों के बंडलों को गिनने के लिए जिन स्थापित और सामान्य नियमों का पालन किया जाना चाहिए था, उन्हें बैंक द्वारा पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

बैंक ने एक निजी थर्ड-पार्टी एजेंसी के माध्यम से आउटसोर्स कैश काउंटिंग कर्मचारियों को नियुक्त किया था, जिन्होंने तय नियमों और सुरक्षा संहिताओं का पालन नहीं किया। इसी गुप्त समझौते और लापरवाही के कारण नकदी की गिनती की पूरी प्रक्रिया में बड़ी खामियां और गड़बड़ियां सामने आईं।

महाकुंभ के दौरान हुआ था गुप्त समझौता

वायरल पत्र से यह भी साफ तौर पर उजागर हुआ है कि यह पूरा खेल महाकुंभ के दौरान रचा गया। महाकुंभ के पावन अवसर पर राम मंदिर में देश-विदेश से भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा था, जिसके कारण मंदिर को मिलने वाली दान राशि पिछले आम महीनों की तुलना में कई गुना अधिक बढ़ गई थी। इस भारी नकदी को संभालने और गिनती की प्रक्रिया में तेजी लाने के बहाने, अनिल मिश्रा ने एसबीआई की अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्रा के साथ मिलकर एक नया समझौता पत्र (MoU) साइन कर लिया।

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वरिष्ठ अधिकारियों से जांच कराने की मांग

चंपत राय ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अगस्त 2020 के बाद से एसबीआई के साथ होने वाले सभी आधिकारिक पत्राचार और डीलिंग्स को वे खुद संभाल रहे थे। ऐसे में अनिल मिश्रा और बैंक के मुख्य प्रबंधक द्वारा किया गया यह अलग समझौता नियमों के खिलाफ प्रतीत होता है। उन्होंने साफ कहा कि फरवरी में हुए इस गुप्त समझौते के कारण वित्तीय सुरक्षा और पारदर्शिता से बड़ा खिलवाड़ हुआ है।

चंपत राय ने एसआईटी से मांग की है कि इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए बैंक के शीर्ष और वरिष्ठ प्रबंधन को शामिल कर एक उच्च स्तरीय जांच बिठाई जाए, ताकि यह साफ हो सके कि सामान्य बैंकिंग कोड का उल्लंघन किसके इशारे पर किया गया था।

Location :  Ayodhya

Published :  9 July 2026, 10:39 AM IST

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