UP में अब जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में की देरी, तो ढीली होगी जेब; सरकार ने बढ़ाया विलंब शुल्क

उत्तर प्रदेश सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण को समयबद्ध बनाने के लिए नियमों में बड़ा संशोधन किया है। अब 21 दिन की तय समय सीमा बीतने के बाद पंजीकरण कराने पर कई गुना अधिक विलंब शुल्क (लेट फीस) देना होगा। सरकार का उद्देश्य सरकारी रिकॉर्ड को अधिक सटीक बनाना और लेटलतीफी को रोकना है।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 7 June 2026, 11:43 AM IST
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Amroha : जन्म और मृत्यु के पंजीकरण को ज्यादा व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 की नियमावली में संशोधन करते हुए विलंब शुल्क में कई गुना बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे लोग तय समय के अंदर पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित होंगे और सरकारी रिकॉर्ड अधिक सटीक व अद्यतन रहेंगे।

नई व्यवस्था के तहत अब 21 दिन की निर्धारित अवधि बीतने के बाद पंजीकरण कराने वालों को पहले की तुलना में काफी ज्यादा शुल्क देना होगा। जहां पहले 21 दिन बाद पंजीकरण कराने पर केवल दो रुपये का शुल्क लगता था, वहीं अब इसके लिए 20 रुपये देने होंगे। इसी तरह 30 दिन से एक साल के बीच पंजीकरण कराने पर शुल्क पांच रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है। एक साल से ज्यादा देरी होने पर अब 100 रुपये का शुल्क देना होगा।

किन विभागों पर है जिम्मेदारी?

जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड तैयार करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों की है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह कार्य ग्राम पंचायतों और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से किया जाता है, जबकि शहरों में नगर निकाय इसकी जिम्मेदारी संभालते हैं।

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अधिकारियों का कहना है कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि कई कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की आधारशिला हैं। जन्म प्रमाणपत्र शिक्षा, पहचान पत्र, पासपोर्ट और सरकारी योजनाओं में जरूरी होता है, जबकि मृत्यु प्रमाणपत्र संपत्ति, बीमा और बैंकिंग संबंधी कार्यों के लिए अनिवार्य माना जाता है।

जागरूकता की कमी बनी बड़ी चुनौती

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में लोग अब भी समय पर पंजीकरण नहीं करा रहे हैं। अमरोहा नगर पालिका के अनुसार, जन्म के 21 दिन के भीतर आवेदन करने वालों की संख्या बेहद कम है। वहीं आधे से ज्यादा लोग एक साल से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद प्रमाणपत्र बनवाने पहुंचते हैं। इस देरी के कारण रिकॉर्ड सत्यापन की प्रक्रिया कठिन हो जाती है, जिससे नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

दशकों बाद भी पहुंचे लोग प्रमाणपत्र बनवाने

अधिकारियों के अनुसार, अतीत में ऐसे कई मामले सामने आए जब लोग अपने जन्म के 50 से 60 साल बाद प्रमाणपत्र बनवाने पहुंचे। ऐसे मामलों में पुराने अभिलेख खोजना और उनकी पुष्टि करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

समय पर पंजीकरण की अपील

नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि नया नियम लोगों को जिम्मेदारी का एहसास कराने की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि जन्म या मृत्यु की घटना के बाद 21 दिन के भीतर पंजीकरण अवश्य कराएं, ताकि अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सके और भविष्य में किसी प्रकार की दस्तावेजी परेशानी न हो।

Location :  Amroha

Published :  7 June 2026, 11:43 AM IST

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