अविमुक्तेश्वरानंद मामले से जुड़े विवाद को समझिये 5 प्वाइंट्स में, जानिये कब क्या हुआ?

प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन में विवाद हुआ। पुलिस ने पालकी रोकी और शिष्यों से मारपीट की। इस विवाद को इन पांच प्वाइंट्स में समझिए

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 21 January 2026, 3:44 PM IST
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Prayagaraj: प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर गंगा स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद शुरू हुआ। रविवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल जाने के लिए कहा। इस पर उनके शिष्यों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद पुलिस और शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की हुई। आरोप है कि इस दौरान कुछ ब्राह्मणों के साथ मारपीट भी की गई।

धरने पर बैठे शंकराचार्य

शिष्यों के साथ हुई कथित बदसलूकी और पालकी रोके जाने से नाराज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया। उन्होंने इसे धर्म और परंपराओं का अपमान बताया। यह धरना पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा और साधु-संत समाज में नाराजगी देखने को मिली।

मेला प्रशासन का नोटिस

सोमवार देर रात करीब 12 बजे माघ मेला के कानूनगो अनिल कुमार शंकराचार्य के शिविर पहुंचे और शिष्यों से नोटिस लेने को कहा। शिष्यों ने देर रात होने का हवाला देते हुए नोटिस लेने से इनकार कर दिया और सुबह आने को कहा। इसके बाद मंगलवार सुबह कानूनगो दोबारा शिविर पहुंचे और गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया। यह नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया था।

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शंकराचार्य पदवी पर सवाल

नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला देते हुए पूछा गया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वयं को शंकराचार्य कैसे घोषित किया। इस पर अविमुक्तेश्वरानंद ने 24 घंटे के भीतर 8 पेज का जवाब ई-मेल के जरिए भेजा। उन्होंने नोटिस को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश उन्हें शंकराचार्य पद पर रहने से नहीं रोकता। मामला पहले से कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में किसी तीसरे पक्ष को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।

मानहानि का दावा और संतों की प्रतिक्रिया

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने चेतावनी दी है कि यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया तो वे कोर्ट में मानहानि का दावा करेंगे। वहीं, द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद महाराज ने घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रशासन को माफी मांगनी चाहिए और गंगा स्नान से रोकना शास्त्रों के विरुद्ध है। गौरतलब है कि स्वामी सदानंद महाराज और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद दोनों ही स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं और उनके निधन के बाद दोनों शंकराचार्य बने थे। फिलहाल ज्योतिषपीठ की पदवी को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद और वासुदेवानंद के बीच मामला अदालत में विचाराधीन है।

Location : 
  • Prayagraj

Published : 
  • 21 January 2026, 3:44 PM IST

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