मेला प्राधिकरण के नोटिस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार, 8 पन्नों में दिया कानूनी जवाब; लीगल एक्शन की चेतावनी

प्रयागराज मेला प्राधिकरण के नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आठ पन्नों का विस्तृत पत्र भेजकर स्वयं को शंकराचार्य बताया है। उन्होंने अभिषेक, सुप्रीम कोर्ट आदेश और अन्य पीठों के समर्थन का हवाला देते हुए नोटिस को असंवैधानिक बताया।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 21 January 2026, 1:42 PM IST
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Prayagraj: प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा शंकराचार्य पद को लेकर जारी नोटिस के बाद विवाद और गहराता जा रहा है। अब श्रीविद्या मठ के महंत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एके मिश्रा के माध्यम से मेला प्राधिकरण को आठ पन्नों का विस्तृत जवाब भेजा है। जवाब में उन्होंने न सिर्फ सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है, बल्कि स्पष्ट शब्दों में कहा, “हां, मैं शंकराचार्य हूं।”

उत्तराधिकारी नियुक्ति का दिया पूरा ब्यौरा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने जवाब में कहा है कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अपने जीवनकाल में ही उन्हें उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था। 11 सितंबर 2022 को स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने के बाद 12 सितंबर 2022 को वैदिक विधि-विधान के साथ उनका विधिवत अभिषेक किया गया। सार्वजनिक समारोह में उन्हें शंकराचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया, जिसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी प्रस्तुत की जा चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट और अन्य पीठों का हवाला

जवाब में यह भी उल्लेख किया गया है कि 14 अक्टूबर 2022 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में अभिषेक का तथ्य दर्ज है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि शंकराचार्य पद पर बने रहने को लेकर किसी भी न्यायालय से कोई स्थगन आदेश नहीं है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने श्रृंगेरी, द्वारका और पुरी पीठ के शंकराचार्यों के समर्थन का दावा भी अपने जवाब में किया है।

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वसीयत को बताया वैध और मान्य

नोटिस के जवाब में भारत धर्म महामंडल द्वारा दी गई मान्यता का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही कहा गया है कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की पंजीकृत वसीयत पूरी तरह वैध है। गुजरात हाईकोर्ट द्वारा वसीयत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज किए जाने का हवाला भी जवाब में शामिल किया गया है। इसके अलावा विरोधी पक्ष द्वारा दिए गए बयानों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर मानहानि वाद का जिक्र करते हुए बताया गया कि विरोधी ने अपना आवेदन बाद में वापस ले लिया था।

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मेला प्रशासन को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्राधिकरण के नोटिस को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया है। जवाब में कहा गया है कि शंकराचार्य पद से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और तीसरे पक्ष के बयान सब-ज्यूडिस हैं। ऐसे में प्रशासनिक हस्तक्षेप न केवल अनुचित है, बल्कि परंपरा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला भी है।

लीगल एक्शन की चेतावनी

जवाब के अंत में साफ कहा गया है कि अगर 24 घंटे के भीतर मेला प्रशासन नोटिस वापस नहीं लेता है, तो कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट और शंकराचार्य परंपरा व स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की छवि धूमिल करने के आरोप में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह जवाब मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को ई-मेल के माध्यम से भी भेज दिया गया है।

Location : 
  • Prayagraj

Published : 
  • 21 January 2026, 1:42 PM IST

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