स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विवादों से रहा पुराना नाता, जानें कब-कब भिड़े प्रशासन से और क्या-क्या हुआ?

मौनी अमावस्या स्नान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान नहीं करने देने पर बवाल मचा हुआ है। आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों को पुलिस ने जमकर पीटा। वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए थे।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 21 January 2026, 3:01 PM IST
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New Delhi: माघ मेला प्रयागराज में चल रहा है। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या स्नान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान नहीं करने देने पर बवाल मचा हुआ है। आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों को पुलिस ने जमकर पीटा। वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए थे।

सोमवार को अफसरों ने अविमुक्तेश्वरानंद के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत उनको शंकराचार्य का प्रोटोकॉल देने का कोई प्रावधान नहीं है। इससे पहले भी उन्हें माघ मेले में कभी भी शंकराचार्य के रूप में सुविधा नहीं दी गई है।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में मंदिर तोड़ने का विरोध

अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने के दौरान दर्जनों पुराने मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध किया। उन्होंने इसे हिंदू धार्मिक परंपराओं के खिलाफ बताया और कहा कि विकास के नाम पर मंदिरों को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।

जून 2022 में ज्ञानवापी कॉम्प्लेक्स में पूजा का ऐलान

ज्ञानवापी कॉम्प्लेक्स में पूजा का ऐलान और भूख हड़ताल:उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद कॉम्प्लेक्स में पूजा करने का ऐलान किया, लेकिन पुलिस ने रोक दिया। इसके विरोध में उन्होंने 108 घंटे की भूख हड़ताल की जो मीडिया में खूब चर्चा में रही। 11 सितंबर 2022 को उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद उन्होंने वह ज्योतिष्पीठ के नए शंकराचार्य बने। इसको लेकर भी काफी बवाल मचा.जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया।

जनवरी 2023 में जोशीमठ में भूमि धंसाव पर PIL

जोशीमठ में भूमि धंसाव पर सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल की और जलवायु परिवर्तन के खतरे पर बात की.ये दिखाता है कि वो धार्मिक मुद्दों के अलावा पर्यावरण पर भी बोलते हैं। इसी तरह वह राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में न्योता मिलने पर भी नहीं शामिल हुए और उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के अधूरे होने की आलोचना की।

जुलाई 2024 में उद्धव ठाकरे को घेरा

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को धोखा दिए जाने पर बोले कि धोखा सबसे बड़ा पाप है। उन्‍होंने कहा कि ठाकरे फिर CM बनें तो लोगों का दर्द कम होगा। PM मोदी को दुश्मन न बताते हुए कहा कि गलती पर सुधार जरूरी है.स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने उन्हें फेक बाबा कहा और कांग्रेस का समर्थन होने का आरोप लगाया। प्रियंका गांधी के 2022 के लेटर का जिक्र किया, जिसमें उन्हें शंकराचार्य कहा गया था। अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे खारिज किया.अविमुक्‍तेश्‍वरानंद ने केदारनाथ मंदिर से 228 किलो सोना गायब होने का आरोप लगाया और इसे गोल्ड स्कैम कहा।

CM बने रहे तो स्टाम्पेड जैसी घटनाएं दोबारा होंगी

जुलाई 2025: स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद सरस्‍वती ने कहा कि अगर योगी CM बने रहे तो स्टाम्पेड जैसी घटनाएं दोबारा होंगी। ये राजनीतिक बयान काफी विवादास्पद रहा.मालेगांव ब्लास्ट पर 'भगवा टेरर' शब्द की आलोचना की उन्‍होंने 2008 मालेगांव ब्लास्ट केस में सभी आरोपी बरी होने पर बोले कि आतंकवाद को रंग से न जोड़ें। भगवा टेररिस्ट की पूजा करोगे क्या? कहकर कहा कि टेररिस्ट बस टेररिस्ट होता है। महाराष्ट्र सरकार ने स्टेट गेस्ट स्टेटस रद्द किया। उनके एंटी-बीजेपी बयानों के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उनका स्टेट गेस्ट स्टेटस रद्द कर दिया। गोविंदानंद ने उन पर FIR की मांग की।

प्रयागराज के माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर बड़ा विवाद हुआ। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती संगम स्नान के लिए पहुंचे। वे अपने करीब 200 शिष्यों के साथ रथ और पालकी पर सवार होकर संगम तट की ओर बढ़े, लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस ने कहा कि पैदल चलकर स्नान करें। शिष्यों ने इस पर विरोध किया,जिससे झड़प हो गई। पुलिस ने आरोप लगाया कि बिना अनुमति के जत्था आया था और बैरिकेड तोड़े गए।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 21 January 2026, 3:01 PM IST

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